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PITRUPAKSHA VISHESH TANTROKT TARPAN

sadhanapath official

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PITRUPAKSHA VISHESH TANTROKT TARPAN

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पितृपक्ष विशेष श्री बगलामुखी तांत्रिक तर्पण प्रयोग मनुष्य जीवन का सबसे कड़वा सच यह है कि हमारे दुखों, बाधाओं, बीमारियों और तरक्की में रुकावट का एक बहुत बड़ा कारण 'पितृदोष' होता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रत्येक मनुष्य जन्म लेते ही तीन प्रकार के ऋणों से बंध जाता है देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। १. देव ऋण : यज्ञ, हवन और पूजन आदि से इस ऋण से उऋण होते हैं। २. ऋषि ऋण : वेदों के अध्ययन और ज्ञान की साधना से ऋषि ऋण चुकता होता है। ३. पितृ ऋण : श्राद्ध और तर्पण करने से मनुष्य इस ऋण से उऋण होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि देव कार्य एक बार के लिए ऐच्छिक हो सकता है, पर पितृ कर्म किसी भी परिस्थिति में त्याज्य नहीं है। परंतु देव कार्य के लिए कर्ज लिया जा सकता है, लेकिन पितृ कार्य के लिए कर्ज लेना सख्त मना है। वैदिक पद्धति में श्रद्धा करवाने के लिए पुरोहित कि आवश्यकता पड़ती ही है अक्सर ऐसे कड़े नियमों और जटिल प्रथा परंपराओं के कारण सामान्य पितृ कर्म आम लोगों के लिए काफी क्लिष्ट कठिन हो जाता है और लोग पितरों के आशीर्वाद से वंचित होते हैं तथा उनके पितृ पितृलोक में अतृप्त रह जाते हैं। लेकिन तंत्र मार्ग के साधकों के लिए यह अत्यंत सुलभ है। पूज्यश्री गुरुमाँ ब्रह्मांडनायिका सुदर्शनसाधना जी ने हम सभी शिष्यों पर कृपा करते हुए तांन्त्रोक्त तर्पण ' का सरल मार्ग प्रदान किया है। ------------------------------------------------------------ तांत्रोक्त तर्पण की विशेषताएँ सरल : इसके लिए न तो किसी पुरोहित की आवश्यकता है और न ही लंबी-चौड़ी पूजन सामग्री की। इसे मात्र ३ मिनट में संपन्न किया जा सकता है। संपूर्ण : भगवती बगलामुखी का यह तर्पण विधान होने के कारण इसमें पितरों के साथ देवी देवताओं का तथा संपूर्ण गुरु मंडल का तर्पण हो जाता है इस कारण इसमें पितरों के साथ भगवती देवी देवताओं और गुरुओं का भी हमें आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिशा का बंधन नहीं : तांत्रोक्त विधि होने के कारण आप इसे पूर्व या दक्षिण, किसी भी दिशा में मुख करके कर सकते हैं। स्थान की स्वतंत्रता : इसे किसी पवित्र जलाशय के पास या सीधे अपने घर में किया जा सकता है। मानसिक तर्पण : सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बिना किसी सामग्री के, आप कहीं भी, कभी भी इसे केवल मानसिक रूप से भी कर सकते हैं। ------------------------------------------------------------ [पितृ पक्ष श्राद्ध तर्पण के लिए आरक्षित समय है ] इस वर्ष 2026 पितृपक्ष की मुख्य तिथियां तारीख प्रतिपदा श्राद्ध (आरंभ) : 27 सितंबर 2026, रविवार सर्वपितृ अमावस्या (समापन) : 10 अक्टूबर 2026, शनिवार ------------------------------------------------------------ [तर्पण संध्या काल के में ही किया जाता है] दिन में तीन बार संध्याकाल आता है प्रातः काल संध्या : सुबह 04:30 से 06:30 तक मध्यान काल संध्या : दोपहर 11:30 से 01:30 तक सायं काल संध्या : शाम 04:30 से 06:30 तक ------------------------------------------------------------ जब स्वयं जगज्जननी स्वरूप पूज्यश्री गुरुमाँ ने हमें इतना सुलभ मार्ग दे दिया है, तो फिर पितृदोष और दुखों को क्यों झेलना? इस दिव्य तांत्रोक्त तर्पण को पूरी विधि और मंत्रों को समझने के लिए दी गई पूज्यश्री गुरुमाँ की विशेष वीडियो को अवश्य देखें। इस पितृपक्ष में रोज़ केवल 3 मिनट निकालें, स्वयं भी तृप्त हों और अपने पूर्वजों को भी मुक्ति का मार्ग दें!