कबीर वाणी || वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊं रे || Vaari Jau Re Balihari Jau Re || भोमाराम मेव भाण्डु
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कबीर वाणी || वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊं रे || Vaari Jau Re Balihari Jau Re || भोमाराम मेव भाण्डु
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कबीर वाणी || वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊं रे || Vaari Jau Re Balihari Jau Re || भोमाराम मेव भाण्डु
वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊं रे, मारे सतगुरु आंगण आया..."
अर्थ: मैं अपने सतगुरु पर पूरी तरह से न्योछावर (बलिहारी) जाता हूँ, क्योंकि आज मेरे घर (हृदय रूपी आंगन) में स्वयं सतगुरु पधारे हैं।
"सतगुरु आंगण आया, हे गंगा गोमती लाया रे, मारी निर्मल हो गयी काया..."
अर्थ: गुरु के आने से ऐसा लगता है मानो घर बैठे ही गंगा और गोमती जैसी पवित्र नदियाँ आ गई हों। उनके ज्ञान रूपी जल से स्नान करके मेरी काया (मन और शरीर) बिल्कुल पवित्र और निर्मल हो गई है।
"सब सखी मिलकर हालो, केसर तिलक लगावो रे..."
अर्थ: सभी सत्संगी और भक्तजन (सखियाँ) मिलकर गुरुदेव के स्वागत के लिए आगे बढ़ो और उन्हें आदरपूर्वक केसर का तिलक लगाओ।
विशेषताएं
गायक: भोमाराम मेव (भाण्डु वाले), जो मारवाड़ी और राजस्थानी लोक भजनों व कबीर वाणी को अपनी खड़ताल, ढोलक और हारमोनियम की जुगलबंदी के साथ गाने के लिए जाने जाते हैं।
विधा: राजस्थानी लोक भजन / निर्गुण सत्संग वाणी।