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एक फूल फूले हैं काशी, ता दूसरे बनारस हो 🌸 | पारंपरिक बघेली सोहर | बघेली लोकगीत

🎵 सुर संसार | SUR SANSAR

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एक फूल फूले हैं काशी, ता दूसरे बनारस हो 🌸 | पारंपरिक बघेली सोहर | बघेली लोकगीत

224 просмотра · 5 дней назад
🎵 सुर संसार | SUR SANSAR
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🌸 एक फूल फूले हैं काशी, ता दूसरे बनारस हो... सखिया! तीसरे फूल फूले मोरे अंगना, मोरे अचरा चहूँ ओर हो... 🌸 एक पारंपरिक बघेली सोहर, जिसमें फूलों के सुंदर रूपक के माध्यम से घर-आँगन की खुशी और नवजीवन के उत्सव को व्यक्त किया गया है। 🎵 गीत: पारंपरिक बघेली सोहर 🗣️ लोकभाषा: बघेली 🌾 क्षेत्र: बघेलखंड / विंध्य क्षेत्र 🎶 अवधि: 2:32 काशी और बनारस के फूलों के बाद “मोरे अंगना” का तीसरा फूल — यही इस लोकगीत की सुंदर कल्पना है। ❤️ यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि हमारी बोली, हमारी लोक-स्मृति और पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपरा का एक हिस्सा है। 🙏 बघेली लोकगीत अमर रहें 🌾 हमारी बोली — हमारी पहचान 🌾 अगर आपको पारंपरिक बघेली लोकगीत, सोहर और हमारे गाँव-घर की लोक-संस्कृति पसंद है, तो चैनल को Subscribe जरूर करें। ❤️ 🎧 गीत सुनें और अपनी यादों से जुड़ें। #बघेली #बघेलीसोहर #बघेलीलोकगीत #बघेलखंड #सोहर #लोकगीत #Bagheli #BagheliSohar #BagheliLokgeet #Baghelkhand