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Nana Patekar: 25 पैसे से 3 National Awards तक का दर्दनाक सफर!

Dainik Tribune

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Nana Patekar: 25 पैसे से 3 National Awards तक का दर्दनाक सफर!

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The Inspiring Journey of Nana Patekar: भारतीय सिनेमा में 'हीरो' तो बहुत आए, लेकिन पर्दे पर अंगारों की तरह दहकने और असल जिंदगी में मोम की तरह पिघलने वाले नाना पाटेकर (Nana Patekar) जैसा फनकार शायद ही कोई दूसरा हुआ हो। महाराष्ट्र के मुरुड़-जंजीरा में 25 पैसे की जेबखर्ची और मुंबई की सड़कों पर 15 रुपये में ज़ेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने से लेकर 3 नेशनल अवॉर्ड्स (National Film Awards) जीतने और 1999 के कारगिल युद्ध (Kargil War) में सैनिकों के साथ मोर्चे पर डटे रहने तक—नाना पाटेकर की यह दास्तान किसी भी इंसान को भावुक और गौरवान्वित कर देगी। जब साल 2015 में नाना 1.5 करोड़ की लग्जरी कार खरीदने वाले थे, तब टीवी पर सूखाग्रस्त किसानों की बेबसी देखकर उन्होंने चेक फाड़ दिया और 'नाम फाउंडेशन' (Naam Foundation) की नींव रखी, जिसके ज़रिए आज 77 लाख से ज्यादा किसानों और 178 नदियों को नई ज़िंदगी मिली। In this special biographical tribute by Parvesh Bamel (Dainik Tribune): Early Struggle: 11 साल की उम्र में पत्थर की खदानों में काम और ₹35 महीने पर गुज़ारा Cinematic Brilliance: 'गमन' से शुरुआत, 'परिंदा' का अन्ना, 'क्रांतिवीर' का प्रताप और 'वेलकम' का उदय शेट्टी The Military Bond: फिल्म 'प्रहार' की ट्रेनिंग, टेरिटोरियल आर्मी और 1999 कारगिल युद्ध में 60 दिन अग्रिम चौकियों पर तैनाती Naam Foundation Reality: 1.5 करोड़ की लग्जरी कार छोड़ने से लेकर ₹60 करोड़ से 77 लाख किसानों तक राहत पहुँचाने की कहानी 2,246 जल स्रोतों का पुनरुद्धार और 40,000 करोड़ लीटर पानी का संचयन बॉलीवुड की चकाचौंध के बीच अंधेरी के 1.1 लाख वाले 1 BHK घर में बिताई सादगी भरी ज़िंदगी नाना पाटेकर का कौन सा किरदार आपके दिल के सबसे करीब है—'क्रांतिवीर' का प्रताप, 'परिंदा' का अन्ना या 'वेलकम' का उदय शेट्टी? अपनी राय नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएं। वीडियो को लाइक और शेयर करें ताकि भारतीय सिनेमा के इस सच्चे फकीर और ज़मीनी मसीहा की कहानी हर भारतीय तक पहुँचे। #NanaPatekar #NaamFoundation #KargilWar #RealHero #IndianCinema #ParveshBamel #DainikTribune #BollywoodLegends #Krantiveer #WelcomeMovie Nana Patekar: 25 पैसे से 3 National Awards तक का दर्दनाक सफर! ‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। Subscribe for more videos:    / @dainiktribunechd   Like us on Facebook:   / dainiktribunechd   Follow us on Twitter:   / dainiktribune   Download Dainik Tribune epaper App: https://bit.ly/3ghljcf