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बोली | कबीर अमृत वाणी | ऐसी वाणी बोलिए & माला फेरत जुग भया | Kabir Das Ke Dohe | Kabir Bhajan

V Y O M • M A N T R A

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बोली | कबीर अमृत वाणी | ऐसी वाणी बोलिए & माला फेरत जुग भया | Kabir Das Ke Dohe | Kabir Bhajan

430 просмотров · 2 недели назад
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बोली एक अनमोल है — संत कबीर की अमृत वाणी से प्रेरित एक भावपूर्ण आध्यात्मिक भजन। 🙏 इस भजन में कबीर साहेब के अमर दोहों के माध्यम से वाणी की शक्ति, मधुर शब्दों का महत्व, अहंकार से मुक्ति और मन के भीतर परिवर्तन का सुंदर संदेश प्रस्तुत किया गया है। 🌿 इस भजन का संदेश: वाणी ऐसी हो जो दूसरों को शीतलता दे और स्वयं के मन को भी शांति दे। सच्ची साधना केवल बाहरी कर्मकांड में नहीं, बल्कि अपने मन, विचार और आचरण को बदलने में है। 🌿 इस भजन में शामिल प्रमुख कबीर दोहे: बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि। हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि॥ ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय॥ शब्द-शब्द सब कोई कहै, शब्द के हाथ न पाँव। एक शब्द औषधि करे, एक शब्द करे घाव॥ माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥ कबीर साहेब का संदेश सरल है—बोलने से पहले शब्दों को तौलो और पूजा से पहले अपने मन को बदलो। 🎧 शांत मन से सुनें • मनन करें • आत्मचिंतन करें 🙏 यदि यह भजन आपके मन को छूए, तो Like, Share और Subscribe करें।