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संसार का छलावा और वास्तविक आनंद की खोज | बतन बिसारी रे छले किए हैरान | ‪@shrirajanswami‬ ‪@SPJIN‬

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संसार का छलावा और वास्तविक आनंद की खोज | बतन बिसारी रे छले किए हैरान | ‪@shrirajanswami‬ ‪@SPJIN‬

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संसार का छलावा और वास्तविक आनंद की खोज | बतन बिसारी रे छले किए हैरान | ‪@SPJIN‬ ‪@shrirajanswami‬ प्रणाम सुंदरसाथ जी 🙏इस भावपूर्ण और ज्ञानवर्धक वीडियो में, श्री महामती जी की वाणी के माध्यम से जीवन के सबसे बड़े सत्य और इस संसार के छलावे को गहराई से समझाया गया है. इस वीडियो में आप जानेंगे:छलमय संसार का सच: दुर्योधन के सभा भवन की तरह यह संसार भी एक छलावा है. जहाँ हमें सुख दिखाई देता है, असल में वहाँ केवल तृष्णा और दुःख छिपे हैं. क्षणभंगुर यौवन, पद और धन: जवानी, ऊंचे पद (जैसे IAS, प्रधानमंत्री) और धन आकाश में चमकने वाली बिजली की तरह क्षणिक हैं. इंसान इनके अहंकार में अंधा हो जाता है, पर बुढ़ापा और मृत्यु अटल सत्य हैं. सुख और आनंद में अंतर: हमारी इंद्रियाँ (जीभ का स्वाद, कोमल स्पर्श, मधुर ध्वनि) हमें जो देती हैं, वो केवल कुछ पलों का 'सुख' है. लेकिन 'आनंद' केवल आत्मा का गुण है, जो इंद्रियों से परे सच्चिदानंद अक्षरातीत की शरण में मिलता है. इंद्रियों का बंधन: जैसे हाथी, हिरण और पतंगा केवल एक-एक इंद्रिय के वश में होकर अपने प्राण गंवा देते हैं, वैसे ही मनुष्य पांचों इंद्रियों के भोग में फंसकर ८४ लाख योनियों के चक्रव्यूह में भटक रहा है. मानव जीवन का वास्तविक लक्ष्य: यह मानव शरीर पानी के बुलबुले के समान है, जो कभी भी फूट सकता है. इस अनमोल जीवन का एकमात्र उद्देश्य संसार के मोह-जाल से मुक्त होकर परमात्मा को पहचानना और वास्तविक आनंद (मुक्ति) को प्राप्त करना है.