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मिला हुआ अपने लिए नहीं 12(अ) - Swami Sri Sharnanand Ji Maharaj

Swami Sharnanandji Maharaj

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मिला हुआ अपने लिए नहीं 12(अ) - Swami Sri Sharnanand Ji Maharaj

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Swami Sri Sharnanand Ji Maharaj's Discourse in Hindi स्वामी श्रीशरणानन्दजी महाराज जी का प्रवचन मनुष्य को जरूरत है कि उसे ऐसा जीवन मिले जिसमें दुःख न हो। इसकी पूर्ति संसार की सहायता से नहीं हो सकती क्योंकि संसार जनित सुख अवश्य ही दुःख में बदल जाता है। प्रस्तुत संतवाणी में यह परामर्श दिया गया है कि संसार की कामना छोड़ दो। संसार शरीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक होता है, माँग की पूर्ति में नहीं, अतः अचाह हो जाओ और मरने से डरो मत तो मरने से पहले अमर हो जाआगे। अगर हम तीन बातों को मान लेते हैं किः- • किसी को क्षति नहीं पहुँयेंगे, • यथा शक्ति सहयोग देंगे, • और बदले में कुछ नहीं चाहेंगे, तो हमें योग और स्मृति प्राप्त हो जायेगी। मानव जीवन का यह सिद्धान्त है कि दायित्व पूरा करने से माँग पूरी होती है। सत्य को स्वीकार करने का नाम सत्संग है। सत्य की चर्चा करें और सर्वांश में सत्य को स्वीकार न करें तो हमारी माँग पूरी नहीं होगी।