આનંદઘનની આત્માનુભૂતિ પદ-૪ પ્રવચન-૫ ટા.૯ કલાકે તા.૨૯/૮/૨૦૨૬
Pundi Jain Mahajan
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આનંદઘનની આત્માનુભૂતિ પદ-૪ પ્રવચન-૫ ટા.૯ કલાકે તા.૨૯/૮/૨૦૨૬
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Pundi Jain Mahajan
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जागी अनुभव प्रीत, सुहागण..
जागी अनुभव प्रीत..
नींद अज्ञान अनादि की..
मिट गयीनिज रित..
जागी अनुभव प्रीत, सुहागण..
जागी अनुभव प्रीत..
घट मंदिरदीपक कियो..
सह ज सु ज्योति सरूप..
आप पराई आप ही..
ठानत वस्तु अनूप..
जागी अनुभव प्रीत, सुहागण..
जागी अनुभव प्रीत..
कहाँ दिखायुं और कु..
कहाँ समजाऊं भोर..
तीर अचूक है, प्रेम का..
लागे सो रहे ठोर..
जागी अनुभव प्रीत, सुहागण..
जागी अनुभव प्रीत..
नाद विलुद्धो प्राण कुं..
गिने न तृण मृग लोय..
आनंद घन प्रभु, प्रेम का..
अकथ कहानी कोय..
जागी अनुभव प्रीत, सुहागण..
जागी अनुभव प्रीत..