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Powerful Mahamrityunjay Mantra 108 TIMES - हर मनोकामना पूर्ति करने वाला शिव महामंत्र - महामृत्युंज

Shiv Bhakti Dhun

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Powerful Mahamrityunjay Mantra 108 TIMES - हर मनोकामना पूर्ति करने वाला शिव महामंत्र - महामृत्युंज

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🔔Click To Subscribe Our Channel - https://shorturl.at/yGrpx Shiv Bhakti Dhun Presents -- Powerful Mahamrityunjay Mantra 108 TIMES - हर मनोकामना पूर्ति करने वाला शिव महामंत्र - महामृत्युंज #महामृत्युंजयमंत्र #MahamrityunjayaMantra108Times #LordShiva #mahamrityunjayamantra ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् || . #mahamrityunjayamantra #mahadev #shiva #mahakal #lordshiva #omnamahshivaya #mantra #siva #shivshambhu #shivshanker #powerfulprayer #chantingmantras #chanting #chant #mantrachanting #bhagwanshivamantra #bhagwanshiv #mrityunjay #hinduprayer #lordshiva #shivji #mahamrityunjaya #immortality #shivajimaharaj #mantras #triyambakam #neelakanta #tryambaka #vishweshwara #vishveshwara #vaidhyanatha #shivapurana #shivasutra #shivbhajan2026 #shivaarti #mondayspecial #shivbhajan #shivmantra #somvar #shivbhajannew2026 #shivbhajannew #shivbhajan #shivbhakt #shivbhakti #shivshankar #shivmantra #shivbhajan #shiv #shivmantrachanting #omjaishivomkara #shivjikiaarti #shiva #shivbhajan #lordshiva #omnamahshivayasong #aumnamahshivaya #omnamahshivayamantra मंत्र का अर्थ हम त्रिनेत्र को पूजते हैं, जो सुगंधित हैं, हमारा पोषण करते हैं, जिस तरह फल, शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं। || महामृत्यंजय मंत्र के रचयिता || महामृत्युंजय मंत्र की रचना करनेवाले मार्कंडेय ऋषि तपस्वी और तेजस्वी मृकण्ड ऋषि के पुत्र थे। बहुत तपस्या के बाद मृकण्ड ऋषि के यहां संतान के रूप में एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम उन्होंने मार्कंडेय रखा। लेकिन बच्चे के लक्षण देखकर ज्योतिषियों ने कहा कि यह शिशु अल्पायु है और इसकी उम्र मात्र 12 वर्ष है। जब मार्कंडेय का शिशुकाल बीता और वह बोलने और समझने योग्य हुए तब उनके पिता ने उन्हें उनकी अल्पायु की बात बता दी। साथ ही शिवजी की पूजा का बीजमंत्र देते हुए कहा कि शिव ही तुम्हें मृत्यु के भय से मुक्त कर सकते हैं। तब बालक मार्कंडेय ने शिव मंदिर में बैठकर शिव साधना शुरू कर दी। जब मार्कंडेय की मृत्यु का दिन आया उस दिन उनके माता-पिता भी मंदिर में शिव साधना के लिए बैठ गए। जब मार्कंडेय की मृत्यु की घड़ी आई तो यमराज के दूत उन्हें लेने आए। लेकिन मंत्र के प्रभाव के कारण वह बच्चे के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और मंदिर के बाहर से ही लौट गए। उन्होंने जाकर यमराज को सारी बात बता दी। इस पर यमराज स्वयं मार्कंडेय को लेने के लिए आए। यमराज की रक्तिम आंखें, भयानक रूप, भैंसे की सवारी और हाथ में पाश देखकर बालक मार्कंडेय डर गए और उन्होंने रोते हुए शिवलिंग का आलिंगन कर लिया। जैसे ही मार्कंडेय ने शिवलिंग का आलिंगन किया स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए और क्रोधित होते हुए यमराज से बोले कि मेरी शरण में बैठे भक्त को मृत्युदंड देने का विचार भी आपने कैसे किया? इस पर यमराज बोले- प्रभु मैं क्षमा चाहता हूं। विधाता ने कर्मों के आधार पर मृत्युदंड देने का कार्य मुझे सौंपा है, मैं तो बस अपना दायित्व निभाने आया हूं। इस पर शिव बोले मैंने इस बालक को अमरता का वरदान दिया है। शिव शंभू के मुख से ये वचन सुनकर यमराज ने उन्हें प्रणाम किया और क्षमा मांगकर वहां से चले गए। यह कथा मार्कंडेय पुराण में वर्णित है। Song : Mahamrityunjay Mantra Lyrics : Traditional Music Label : Ganga Cassette https://shorturl.at/yGrpx 🔔 आप सभी भक्तों से अनुरोध है कि आप @ShivBhaktiDhunचैनल को सब्सक्राइब करें व सभी मंत्रों का आनंद लें व अन्य भक्तों के साथ Share करें व Like जरूर करें Unauthorized downloading and duplicating on YouTube channel may lead to claim/strike by YouTube. Visit Our Website: www.gangadigital.co.in