इंसान क्यों भूल गया अपना असली रूप? | भावपूर्ण आध्यात्मिक भजन | अविराम!
भक्ति और प्रेम Vij AI
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इंसान क्यों भूल गया अपना असली रूप? | भावपूर्ण आध्यात्मिक भजन | अविराम!
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भक्ति और प्रेम Vij AI
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*माया का मेला लगा है… और हम सब इस मेले के मुसाफिर हैं। 🕉️*
धन, दौलत, रिश्ते, नाम और शोहरत—सब कुछ यहीं रह जाना है।
जिस शरीर पर इंसान इतना अभिमान करता है, एक दिन वही मिट्टी में मिल जाता है।
*“माया का मेला”* एक आध्यात्मिक भजन है जो हमें जीवन की असली सच्चाई और मोह-माया की क्षणभंगुरता का एहसास कराता है।
आज हमारे पास समय है, सांस है और प्रभु का नाम लेने का अवसर है।
इसलिए इस जीवन को केवल माया के पीछे भागते हुए न गँवाएँ।
🔥 सुनिए… सोचिए… और अपने भीतर झाँकिए।
🙏 *हर हर महादेव।*
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*अविराम!*
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