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Takhte Adalt तख़्ते अदालत Worship Song Hindi Urdu

YASHARIM EL GOSPEL

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Takhte Adalt तख़्ते अदालत Worship Song Hindi Urdu

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YASHARIM EL GOSPEL
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तख़्ते अदालत लगेगी मुखड़ा (Chorus) तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। क्रॉस लाइन (Cross Line) ख़ामोश रहो, दुआ में रहो, दुआ में रहो और मोहब्बत करो, मुबारक कहो दुश्मनों को सब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 1 (Verse 1) लिखा है तेरे दुश्मन, तेरे ही घर के होंगे। माँ-बाप ना भाई-बहन, ना तेरे नगर के ही होंगे। माँ-बाप ना बहन, ना तेरे शहर के ही होंगे। रूह-ए-दुनिया की मामूरी में, मामूर हैं सब, मामूर हैं सब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। सच्चों की मंडली में झूठे भी मौजूद हैं। भेड़ों के भेष में भेड़िए मौजूद हैं। ये घात लगाए बैठे हैं, तू रखना नज़र, तू रखना नज़र। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 2 (Verse 2) रूह-ए-ख़ुदा के साथ, जिस्मों में चलना है। हर आदमी साँप की नस्ल, साँपों से बचना है। साँपों का काम तो, एड़ी को डसना है। झूठों के बाप की दुनिया, झूठे हैं सब, झूठे हैं सब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। जाने कौन, कब किस घड़ी, धोखा दे जाए। किस दिल में आकर शैतान, मौक़ा ले जाए। रोटी खाकर तेरी, तुझ पर उठाए लात। जो उठते दुआ के लिए, वो तुझ पर ही उठाएँ हाथ। लिबास-ए-वफ़ा, तुझे क्या पता, उतर जाए कब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। दिली नीयत, इरादे को, तेरे वो जाने ख़ुदा। तू असल में कौन है, क्या पहचाने तुझको ख़ुदा? तेरे दिल की गहराइयों में, जाने वो क्या-क्या छिपा। नूर-ए-मसीहा के नूर से, ज़ाहिर होगा सब, ज़ाहिर होगा सब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 3 (Verse 3) वो होगा ज़ाहिर वहाँ, जो यहाँ तूने छिपकर किया। जो छिपा है अँधेरे में, रौशन करेगा ख़ुदा। तेरी जान के बदले वहाँ, कोई न देगा जान। वो उल्फ़त-ए-ख़ुदा, वो फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा, वो क़हर-ओ-ग़ज़ब। (×2) तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। ख़ामोश रहो, दुआ में रहो, दुआ में रहो और मोहब्बत करो, मुबारक कहो दुश्मनों को सब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 1 (Verse 1) लिखा है तेरे दुश्मन, तेरे ही घर के होंगे। माँ-बाप ना भाई-बहन, ना तेरे नगर के ही होंगे। माँ-बाप ना बहन, ना तेरे शहर के ही होंगे। रूह-ए-दुनिया की मामूरी में,,मामूर हैं सब, मामूर हैं सब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 2 (Verse 2) सच्चों की मंडली में झूठे भी मौजूद हैं। भेड़ों के भेष में भेड़िए मौजूद हैं। ये घात लगाए बैठे हैं, तू रखना नज़र, तू रखना नज़र। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 2 (Verse 3 रूह-ए-ख़ुदा के साथ, जिस्मों में चलना है। हर आदमी साँप E नस्ल, साँपों से बचना है। साँपों का काम तो, एड़ी को डसना है। झूठों के बाप की दुनिया, झूठे हैं सब, झूठे हैं सब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 2 (Verse 3 जाने कौन, कब किस घड़ी, धोखा दे जाए। किस दिल में आकर शैतान, मौक़ा ले जाए। रोटी खाकर तेरी, तुझ पर उठाए लात। जो उठते दुआ के लिए, वो तुझ पर ही उठाएँ हाथ। लिबास-ए-वफ़ा, तुझे क्या पता, उतर जाए कब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 2 (Verse 4 दिली नीयत, इरादे को, तेरे वो जाने ख़ुदा। तू असल में कौन है, क्या पहचाने तुझको ख़ुदा? तेरे दिल की गहराइयों में, जाने वो क्या-क्या छिपा। नूर-ए-मसीहा के नूर से, ज़ाहिर होगा सब, ज़ाहिर होगा सब। तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब। अंतरा 3 (Verse 5 जो छिपा है अँधेरे में, रौशन करेगा ख़ुदा। वो होगा ज़ाहिर वहाँ, जो यहाँ तूने छिपकर किया। तेरी जान के बदले वहाँ, कोई न देगा जान। वो उल्फ़त-ए-ख़ुदा, वो फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा, वो क़हर-ओ-ग़ज़ब। (×2) तख़्ते अदालत लगेगी, जब ज़ाहिर करेगा गुनाह सबके रब।