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Neelkanth Mahadev | Shiv Bhajan शिव भजन | नीलकंठ महादेव | Samudra Manthan Song | समुद्र मंथन कथा

Sanathan Katha India

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Neelkanth Mahadev | Shiv Bhajan शिव भजन | नीलकंठ महादेव | Samudra Manthan Song | समुद्र मंथन कथा

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Neelkanth Mahadev is an original Hindi Shiv bhajan telling the powerful story of how Lord Shiva saved creation from the deadly Halahal poison during Samudra Manthan. Experience this devotional Shiva song from Sanatan Katha celebrating Mahadev’s compassion, sacrifice and the moment he became known as Neelkanth. #NeelkanthMahadev #ShivBhajan #HarHarMahadev When the ocean was churned in search of Amrit, the deadly Halahal poison emerged first and threatened all of creation. As devas and asuras stood helpless, Lord Shiva came forward. For the protection of the world, Mahadev accepted the poison and held it in his throat. His throat turned blue, and from that moment he became known as Neelkanth — the one who bore the poison so that the world could live. A story of sacrifice. A symbol of compassion. A reminder that true strength protects others. हर हर महादेव। 🔱 LYRICS हर हर महादेव... हर हर महादेव... भोले शंकर... नीलकंठ महादेव... सागर मंथन जब था छिड़ा, अमृत की थी आस। पहले निकला विष भयंकर, छा गया संताप। हलाहल की ज्वाला उठी, व्याकुल हुआ जहान। कौन बचाए सृष्टि सारी, कौन बने भगवान का मान। जब जग पर संकट आया, भोले ने हाथ बढ़ाया। अपने ऊपर विष को लेकर, सारा जग बचाया। बोलो नीलकंठ महादेव, बोलो नीलकंठ महादेव। विष को कंठ में रोक लिया, जय नीलकंठ महादेव॥ जग पर जब संकट छाया, भोले ने हाथ बढ़ाया। हलाहल पीकर जग बचाया, जय नीलकंठ महादेव॥ देव खड़े थे, असुर खड़े थे, सबकी थमी थी साँस। चारों ओर था विष का साया, टूट रही थी आस। भोले शंकर शांत खड़े थे, मन में करुणा अपार। जग की रक्षा करने को फिर, कर लिया विष स्वीकार। ना अपने सुख की चिंता, ना अपने प्राण का भय। जग के लिए जो विष भी पी ले, वही हमारे शिव हैं। बोलो नीलकंठ महादेव, बोलो नीलकंठ महादेव। विष को कंठ में रोक लिया, जय नीलकंठ महादेव॥ जग पर जब संकट छाया, भोले ने हाथ बढ़ाया। हलाहल पीकर जग बचाया, जय नीलकंठ महादेव॥ कंठ में जब विष ठहर गया, नीला हुआ निशान। तब से भोले जग में कहलाए, नीलकंठ भगवान। जिस विष से संसार था काँपा, वह भी शिव ने थामा। अपने दुख को भूल के भोले, जग का दुख अपनाया। नीलकंठ! नीलकंठ! जय जय नीलकंठ! भोले शंकर! भोले शंकर! जय जय भोले शंकर! हर हर भोले! हर हर शंभो! हर हर महादेव! बोलो नीलकंठ महादेव, बोलो नीलकंठ महादेव। विष को कंठ में रोक लिया, जय नीलकंठ महादेव॥ जग पर जब संकट छाया, भोले ने हाथ बढ़ाया। हलाहल पीकर जग बचाया, जय नीलकंठ महादेव॥ अमृत की चाह सभी को थी, विष भोले ने अपनाया। जग को जीवन देने खातिर, अपने कंठ में समाया। यही दया है, यही है करुणा, यही शिव की पहचान। अपने लिए ना कुछ भी माँगा, जग पर किया कल्याण। बोलो भोलेनाथ की— जय! नीलकंठ महादेव की— जय! हर हर शंकर! हर हर शंभो! हर हर महादेव! हर हर महादेव! बोलो नीलकंठ महादेव, बोलो नीलकंठ महादेव। विष को कंठ में रोक लिया, जय नीलकंठ महादेव॥ जग पर जब संकट छाया, भोले ने हाथ बढ़ाया। हलाहल पीकर जग बचाया, जय नीलकंठ महादेव॥ नीलकंठ महादेव! नीलकंठ महादेव! जग के पालनहार हमारे, जय नीलकंठ महादेव! हर हर महादेव... हर हर महादेव... नीलकंठ महादेव... भोले मेरे महादेव... 🙏 Subscribe to Sanatan Katha for original devotional songs, bhajans and cinematic stories from Sanatan Dharma.