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हेली भजन , सार शबद का करो व्यवहार/Heli Bhajan,Saar Shabad Ka Karo Vyavhar .

Arun Goyal official

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हेली भजन , सार शबद का करो व्यवहार/Heli Bhajan,Saar Shabad Ka Karo Vyavhar .

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Arun Goyal official
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इस भजन में सद्गुरु गोरखनाथ जी का यह संदेश अत्यंत सीधा है: वे अपने शरीर के अंदर की सूक्ष्म योग यात्रा का वर्णन कर रहे है और बता रहे है कि हमे किन आंतरिक चक्रों पर परमानंद की उपलब्धि होगी । उनके अनुसार ज्ञान केवल पढ़ने से नहीं आता, अनुभव से आता है। परमात्मा कोई बाहर की सत्ता नहीं, वह भीतर का ही प्रकाश है। और उस प्रकाश तक पहुंचने का मार्ग है — "सार शब्द का व्यवहार"। यदि कोई परमात्मा को पाना चाहता है, तो उसे अपने भीतर की यात्रा करनी होगी — ध्यान, साधना, और सार शब्द के अनुभव के माध्यम से। तभी आत्मज्ञान होगा, और तभी परमात्मा का साक्षात्कार संभव है। अगर यह भजन पसंद आ जाए तो कृपया अपने इष्टमित्रों के साथ जरूर साझा करे 🙏🇮🇳