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अहोई अष्टमी व्रत कथा: साहूकार की बहू की कोख कैसे खुली?

MatruAshish Vani

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अहोई अष्टमी व्रत कथा: साहूकार की बहू की कोख कैसे खुली?

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MatruAshish Vani
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अहोई अष्टमी के पावन पर्व पर सुनिए अहोई माता (स्याहू माता) की संपूर्ण एवं पारंपरिक व्रत कथा मेरी अपनी वाणी में। इस कथा के श्रवण से अहोई माता संतान को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। अहोई माता की कहानी: एक साहूकार था जिसके सात बेटे सात बहुएँ थीं। दिवाली से पहले कार्तिक बदी अष्टमी को सातों बहुएँ अपनी इकलौती ननद के साथ जंगल में जाकर खदान में मिट्टी खोद रही थीं। वहाँ पर स्याहू की मांद थी। मिट्टी खोदते समय ननद के हाथ से स्याहू का बच्चा मर गया। इससे स्याहू माता बहुत नाराज हो गई और बोली कि, मैं तेरी कोख बाँधूँगी। तब ननद अपनी सातों भाभियों से बोली कि, तुम में से कोई अपनी कोख बँधवा लो। तब भाभियों ने अपनी कोख बँधवाने से इनकार कर दिया। परंतु छोटी भाभी सोचने लगी कि अगर मैंने अपनी कोख नहीं बँधवाई तो सासू जी नाराज होंगी। यह सोचकर ननद के बदले में छोटी भाभी ने अपनी कोख बँधवा ली। अब इसके बाद उसको जो बच्चा होता, वह सात दिन का होकर मर जाता। एक दिन उसने पंडित को बुलाकर पूछा कि, मेरी संतान सातवें दिन क्यों मर जाती है? तब पंडित ने कहा कि, तुम सुरही गाय की सेवा करो। सुरही गाय स्याहू माता की भायली है। वह तेरी कोख खुलवा देगी, जब तेरा बच्चा जियेगा। अब वह बहुत जल्दी उठकर चुपचाप सुरही गाय के नीचे साफ-सफाई कर आती। गाय एक पैर से लंगड़ी थी। गऊ माता बोली कि, हर रोज उठकर कौन मेरी सेवा कर रहा है, सो आज देखूँगी। गऊ माता खूब सवेरे उठी। क्या देखती है कि, साहूकार के बेटे की बहू इसके नीचे साफ-सफाई कर रही है। गऊ माता उससे बोली कि, क्या माँगती है? साहूकार की बहू बोली कि स्याहू माता तुम्हारी भायली है और उसने मेरी कोख बाँध रखी है। सो मेरी कोख खुलवा दो। गऊ माता ने कहा अच्छा। अब तो गऊ माता समुद्र पार साहूकार की बहू को अपनी भायली के पास लेकर चली। रास्ते में कड़ी धूप थी। सो वे दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गईं। थोड़ी देर में एक साँप आया। उसी पेड़ पर गरुड़ पंखनी का एक बच्चा था, उसको डसने लगा। तब साहूकार की बहू ने साँप मारकर डाल के नीचे दबा दिया और बच्चे को बचा लिया। थोड़ी देर में गरुड़ पंखनी आई तो वहाँ खून देखकर साहूकार की बहू को चोंच मारने लगी। तब साहूकार की बहू बोली, मैंने तेरे बच्चे को नहीं मारा, बल्कि साँप तेरे बच्चे के करीब आया था। मैंने तो उससे तेरे बच्चे की रक्षा की है। यह सुनकर गरुड़ पंखनी बोली कि मांग, तू क्या माँगती है? वह बोली सात समुंदर पार स्याहू माता रहती हैं, हमें तू उसके पास पहुँचा दे। तब गरुड़ पंखनी ने दोनों को अपनी पीठ पर बैठाकर स्याहू माता के पास पहुँचा दिया। स्याहू माता उनको देखकर बोली कि, आ बहन बहुत दिनों में आई है। फिर कहने लगी बहन मेरे सिर में जूँ पड़ गई हैं। तब सुरही के कहने पर साहूकार की बहू ने उसकी सारी जूँ निकाल दीं। इस पर स्याहू माता प्रसन्न होकर बोली कि, तूने मेरे सिर में बहुत सफाई धेरी है, इसलिए तेरे सात बेटे और सात बहुएँ होंगी। वह बोली मेरे तो एक भी बेटा नहीं, सात बेटे कहाँ से होंगे? स्याहू माता बोली वचन दिया है। बचन से फिरूँ तो धोबी की कुंड पर कंकरी होऊँ। तब साहूकार की बहू बोली कि मेरी कोख तो तुम्हारे पास बंद पड़ी है। यह सुन स्याहू माता बोली कि तूने मुझे ठग लिया है। मेरी कोख खोलती तो नहीं थी पर अब खोलनी पड़ेगी। जा तेरे घर पर तुझे सात बेटे सात बहुएँ मिलेंगी। तू जाकर उजमण करियो। सात अहोई बनाकर सात कड़ाही करियो। वह लौटकर घर आई तो वहाँ देखा कि सात बेटे सात बहू बैठे हैं। वह खुश हो गई। उसने सात अहोई बनाई, सात उजमण किये, सात कड़ाही करी। शाम के समय जेठानिया आपस में कहने लगी कि जल्दी-जल्दी धोख पूजा कर लो। कहीं छोटी बहू को याद करके रोने लगे। थोड़ी देर में उन्होंने अपने बच्चों से कहा अपनी चाची के घर जाकर देख आयो कि आज वह अभी तक रोई क्यों नहीं। बच्चों ने आकर कहा कि चाची तो कुछ मांड रही है। खूब उजमण हो रहा है। यह सुनते ही जेठानिया दौड़ी-दौड़ी वहाँ आई और आकर कहने लगी कि तूने कोख कैसे खुलवाई? वह बोली तुमने तो कोख बंधवाई नहीं थी, सो मैंने कोख बंधवाली ली थी। अब स्याहू माता ने कृपा करके मेरी कोख खोल दी है। हे स्याहू माता! जिस प्रकार उस साहूकार की बहू की कोख खोली, उसी प्रकार हमारी भी कोख खोलियो। एक कटोरी में गेहूँ के दाने लेकर कहानी सुनें। (इस दिन मिट्टी में हाथ नहीं डालना चाहिए।) 🌸 कथा का महत्व: इस पावन दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। कथा सुनते समय हाथ में गेहूं के दाने लेकर माँ का ध्यान करें। 🎙️ *हमारी प्रस्तुति के बारे में:* यह पारंपरिक अहोई अष्टमी व्रत कथा मेरी अपनी आवाज़ में सुनाई गई है। कथा का वाचन, प्रस्तुतीकरण एवं वीडियो संपादन मौलिक प्रयास हैं। कहानी पारंपरिक धार्मिक स्रोतों पर आधारित है और इसे श्रद्धा एवं भक्ति भाव से प्रस्तुत किया गया है। वीडियो में प्रयुक्त कुछ दृश्य AI की सहायता से तैयार किए गए हैं। वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, अपनों के साथ शेयर करें और भक्ति व कथाओं से जुड़े रहने के लिए चैनल को सब्सक्राइब अवश्य करें। जय अहोई माता | जय स्याहू माता 🙏 कथा स्वर: मेरे खुद के स्वर #AhoiAshtami #AhoiMataKatha #AhoiVratKatha #MatruAshishVani