पर्यटन गांव नाला,नल दमयंती की अनोखी प्रेम कहानी का गवाह ।जैविक खेती का गांव नाला।@himalayapremi
Himalaya Premi
0:00 / 0:00
पर्यटन गांव नाला,नल दमयंती की अनोखी प्रेम कहानी का गवाह ।जैविक खेती का गांव नाला।@himalayapremi
1 147 просмотров · 4 года назад
Himalaya Premi
57,9 тыс. подписчиков
1 147 просмотров · 4 года назад
#villagetourism #ancienttemple #ruraltourism
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित गुप्तकाशी से 2 किलोमीटर की दूरी पर खूबसूरत गांव है नाला
महाराजा नल के नाम पर इस गांव का नाम नाला पड़ा। गांव वाले बताते हैं की कालांतर में यहां पर राजा नल का साम्राज्य हुआ करता था ग्राम प्रधान भंडारी जी बताते हैं कि यहां पर लगभग 300 परिवार रहते हैं गांव में पर्यटन के अलावा खेती-बाड़ी बहुत अच्छी है यह गांव खेती-बाड़ी के मामले में उत्तराखंड का एक आदर्श गांव माना जाता है एवं इस गांव में कई स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं गांव वाले बताते हैं कि इस गांव को स्वतंत्रता सेनानियों का गांव भी कहा जाता है गांव का सबसे मुख्य आकर्षण गांव के बीचो बीच मां ललिता माई का भव्य मंदिर है जिसको त्रिपुर सुंदरी ललिता माई भी कहा जाता है कहते हैं कि राजा नल की कुलदेवी मां ललिता त्रिपुर सुंदरी ही थी यह मंदिर लगभग आठवीं नवमी सदी का प्रतीत होता है इस मंदिर के साथ-साथ यहां पर शिव मंदिर पांडव मंदिर महाराजा नल की समाधि एवं पुरातत्व द्वारा खुदाई के उपरांत मिले छोटे-छोटे मंदिर हैं। यह सभी मंदिर नागर शैली में बनाए गए हैं इन मंदिरों में कुछ दुर्लभ मूर्तियां भी विराजमान है जो कि पुरातत्व की खुदाई में मिली है इतना पौराणिक मंदिर होने के बावजूद भी यहां पर पर्यटकों का आना बहुत कम है अभी भी नाला गांव पर्यटन के मानचित्र पर अपनी वाजिब जगह नहीं बना पाया है गांव वाले धीरे धीरे खेती के पुरातन तरीकों को बदलकर नए नए तरीके अपना रहे हैं गांव में ज्यादातर लोगों के पास पॉलीहाउस है जिसमें कि गांव वाले साल भर बैमौसमी सब्जियां उगाते हैं एवं पास के ही मार्केट गुप्तकाशी में बेच देते हैं जिससे गांव वालों को एक अच्छा राजस्व मिल जाता है गांव से 1 किलोमीटर पर चलकर नाला और गढ़तरा के बीच में नलेश्वर महादेव का बहुत प्राचीन मंदिर है इस प्राचीन मंदिर में भी कई पौराणिक मूर्तियां हैं। केदारघाटी के इन गांवों में कितने प्राचीन मंदिर हैं लेकिन सरकार का इन मंदिरों के संरक्षण के लिए कोई कोशिश नहीं है यदि सरकार द्वारा इन मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाता एवं यहां तक जाने के लिए रास्ता बनाया जाता तो तो केदारनाथ यात्रा में आया हुआ हर पर्यटक इन मंदिरों में जरूर जाता लेकिन अफसोस की सरकार का भी इन मंदिरों की तरफ कोई ध्यान नहीं है
यदि आप केदारघाटी में आए हैं तो एक बार इस मंदिर में अवश्य जाएं पौराणिक एक पुरातन मंदर होने के साथ-साथ ये स्थान प्राकृतिक सुंदरता से भी भरपूर है
यदि आप इस गाँव और आस पास घूमना चाहतें हैं तो इन न0 पर कांटेक्ट करें।
संदीप पुजारी - 8433005502
विजय नेगी -9639468793@himalayapremi