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तीन शरीर | Shrimad Bhagavad Gita 18 | Mahamahopadhyay Bhadreshdas Swami | BAPS

BAPS Satsang Hindi

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तीन शरीर | Shrimad Bhagavad Gita 18 | Mahamahopadhyay Bhadreshdas Swami | BAPS

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अध्याय 2 श्लोक 1 : दुसरें अध्याय के प्रथम श्लोक में संजय कहता है कि, श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन को देखते है। दुसरें लोग भी अर्जुन को देख रहे है परन्तु भगवान केवल स्थूल शरीर को ही नहीं परन्तु और भी कुछ देखते है। आइये, स्थूल से अतिरिक्त और भी दो शरीर पर चिंतन सुनें। श्रीमद् भगवद् गीता : उच्चतम आदर्शों और जीवन की कटु वास्तविकता के बिच का एक महान सेतु है। महामहोपाध्याय पूज्य भद्रेशदास स्वामीजी न केवल पारम्पारिक भाष्यकार आचार्य है परन्तु उन्होंने इन आदर्शों का ब्रह्मस्वरूप प्रमुखस्वामीजी महाराज एवं प्रकट ब्रह्मस्वरूप महंतस्वामीजी महाराज जैसे महापुरुषों के जीवन में चरितार्थ दर्शन किया है और चिंतन किया है। स्वामिनारायण अक्षरधाम के सर्जक ब्रह्मस्वरूप प्रमुखस्वामीजी महाराज के शताब्दी महोत्सव के उपक्रम में श्रीमद् भगवद् गीता व्याख्यान माला का आयोजन किया गया है। His Holiness Pramukhswamiji Maharaj https://pramukhswami.org/ BAPS Swaminarayan Sanstha https://www.baps.org/ Swaminarayan Akshardham, New Delhi https://akshardham.com/ Pujya Bhadreshdas swamiji: https://en.wikipedia.org/wiki/Bhadres...