गृहप्रवेश - मालती जोशी || Malti Joshi Ki Kahaniyan -GrihPravesh || Hindi Kahaniyan@kathasakhi
Katha Sakhi : Ruchika
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Katha Sakhi : Ruchika
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गृहप्रवेश - मालती जोशी || Malti Joshi Ki Kahaniyan -GrihPravesh || Hindi Kahaniyan@kathasakhi
मालती जोशी हिंदी साहित्य का एक बड़ा नाम रहीं। उन्होंने साहित्य की दुनिया में काफी योगदान दिया और साथ ही साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी। यही वजह है कि उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया। मालती जोशी का जन्म औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में हुआ था। फिर उन्होंने हिन्दी विषय से एमए किया। फिर अपनी लेखनी की शुरुआत की, तो कई अनगिनत कहानियां और बाल कथाएं लिखीं। उनकी विभिन्न और अनेक रचनाओं की बात करें तो उन्होंने कई कहानियां, बाल कथाएं और उपन्यास लिखे। उनकी रचनाओं की खूबी रही है कि इनमें से अनेक रचनाओं का विभिन्न भारतीय व विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी किया जा चुका है। साथ ही उनकी कहानियों को रेडियो और दूरदर्शन का भी हिस्सा बनाया जा चुका है। उनकी कुछ कहानियों पर गुलज़ार ने भी ‘किरदार’ धारावाहिक में कहानियों को दर्शाया है। साथ ही धारावाहिक ‘सात फेरे’ का भी निर्माण हुआ है। मालती जोशी की अगर शिक्षा की बात की जाए, तो मध्यप्रदेश में उनकी शिक्षा हुई। खासतौर से मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से उनका खास लगाव रहा।
पुरस्कार और सम्मान
मालती जोशी ने अपने जीवनकाल में कई सारे पुरस्कार और सम्मान हासिल किये हैं। उन पुरस्कारों में भारतीय भाषा परिषद के द्वारा ‘कोलकाता का रचना’ पुरस्कार अहम रहा, जो उन्हें वर्ष 1983 को प्राप्त हुआ। इसके बाद, उन्हें वर्ष 1984 में मराठी पुस्तक ‘पाषाण युग’ के लिए ‘महाराष्ट्र शासन’ का पुरस्कार प्राप्त हुआ। फिर मध्य प्रदेश के राज्यपाल द्वारा ‘अहिंदी भाषी लेखिका‘ के रूप में भी उन्हें पुरस्कार दिया गया। साथ ही साथ वर्ष 1985 में सम्मानित किया गया। वर्ष 2006 में मध्यप्रदेश शासन का ‘शिखर सम्मान’ साहित्य अवदान के लिए दिया गया। उन्हें ‘ओजस्विनी पुरस्कार’ और ‘दुष्यंत कुमार साधना पुरस्कार’ से भी नवाजा जा चुका है। साथ ही साथ सम्मानित ‘मैथिलीशरण गुप्त’ जैसे प्रतिष्ठत राष्ट्रीय सम्मान और वनमाली स्मृति सम्मान’ से नवाजा जा चुका है। और तो और मालती जोशी को वर्ष 2018 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है।
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