कचरे से बना गार्डन और बबूल की पत्ती से दवा| हरियाणा का गाँव और चंडीगढ़ का गार्डन
Kartavya Path
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कचरे से बना गार्डन और बबूल की पत्ती से दवा| हरियाणा का गाँव और चंडीगढ़ का गार्डन
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Bharat Yatra Day 18
यमुनानगर से चंडीगढ़ की यात्रा में इस बार रास्ते में कई ऐसे अनुभव मिले, जिनके बारे में पहले कभी नहीं देखा था।
रास्ते में हमने देखा कि लोग धान को सड़क के किनारे फैलाकर सुखा रहे थे। जब हमने उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि धान को इस तरह फैलाने से वह अच्छी तरह सूखता है और साफ भी हो जाता है।
आगे रास्ते में दो बुजुर्ग देशी बबूल की पत्तियाँ तोड़कर झोले में भर रहे थे। हमने जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि इन पत्तियों से दवाई बनाई जाती है और उनके अनुसार इसका उपयोग शुगर समेत कई समस्याओं में किया जाता है।
इसके बाद हम पंचकुला पहुँचे, जहाँ Ola Electric सेंटर पर अपनी Ola S1 X+ को चार्ज किया और कुछ देर आराम करने के बाद चंडीगढ़ के लिए निकल पड़े।
चंडीगढ़ में हमने देखा Rock Garden of Chandigarh, जिसे नेक चंद सैनी ने कबाड़ और बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं से अपनी कल्पना और मेहनत के दम पर एक खूबसूरत कलाकृतियों की दुनिया में बदल दिया। नेक चंद जी के इस असाधारण कार्य को बाद में सार्वजनिक पहचान मिली और उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। उनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियों और इस पूरे गार्डन की कहानी अपने आप में बेहद प्रेरणादायक है।
इसके बाद शाम के समय हम Sukhna Lake पहुँचे। शाम के समय रोशनी कम होने की वजह से नजारा उतना साफ नहीं दिख रहा था, लेकिन झील और आसपास का वातावरण बेहद सुंदर लगा।
रात में रहने और भोजन की व्यवस्था की तलाश करते हुए हम चंडीगढ़ के सेक्टर 8 स्थित एक गुरुद्वारे पहुँचे। यहाँ हमें रहने के लिए स्थान, गद्दा, चादर और तकिया मिला, साथ ही लंगर में भोजन भी मिला वह भी बिना किसी शुल्क के।
यात्रा के दौरान इस तरह की सेवा और अपनापन देखकर मन बहुत प्रसन्न हुआ
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