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nb-2025-08-15- मेरी महारानी श्रीराधा रानी || नहिं ऐसो जनम बारम्बार || रसिया गायन

Maan Mandir

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nb-2025-08-15- मेरी महारानी श्रीराधा रानी || नहिं ऐसो जनम बारम्बार || रसिया गायन

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मेरी महारानी श्रीराधा रानी | जाके बल मैं सबसौं तोरी लोक वेद कुल कानी | प्राण जीवन धन लाल बिहारी को वारि पियत नित पानी | भगवत रसिक सहायक सब दिन सर्वोपरि सुखदानी || नहिं ऐसो जनम बारम्बार । का जानूँ कछु पुण्य प्रगटै मानुषा अवतार ॥ बढ़त छिन-छिन घटत पल-पल जात न लागे बार । बिरछ के ज्यों पात टूटै नहीं पुनि डार ॥ भौ सागर अति जोर कहिए अनंत ऊंची धार । राम नाम का बांध बेड़ा उतर परले पार ॥ ज्ञान चौसर मण्डी चौहटे सुरन पासा सार । या दुनिया में रची बाजी जीत भावैं हार ॥ साधु संत महन्त ज्ञानी चलत करत पुकार । दासी 'मीरा' लाल गिरधर जिवणां दिन चार ॥ जनम तो बादिहि गयौ सिराइ । हरि सुमिरन नहीं गुरु की सेवा, मधुबन बस्यौ न जाइ । अब की बार मनुष्य देह धरि कियो न कछु उपाइ । भटकत फिरयो स्वान की नाई नैंक जूठ के चाइ | कबहूं न रिझए लाल गिरिधरन, बिमल बिमल जस गाइ । प्रेम सहित पग बाँधि घूँघुरु सक्यौ न अंग नचाइ | श्री भागवत सुना नहिं स्रवननि नैंकहुँ रुचि उपजाइ । आनि भक्ति करि, हरिभक्तनि के कबहूं न धोए पाइ ॥ अब हों कहा करो करूनामय, कीजै कौन उपाय | भव अंबोधि, नाम निज नौका, सूरहि लेहु चढ़ाइ || बधाई बाजै भानुराय दरबार ॥ बजे नगाड़े बड़े भोर ही जनमी भानुदुलार, घननननननन घंटा बाजै धौंसा की धधकार । दधि कौ कांदौ अँगना में भयो बह रहे खार पनार, माखन के लौंदा फिक रहे जहँ बही दूध की धार । गोपी नाचैं झूमक फुंदना लटके झुब्बादार, फरिया फररर कर सैंकारो लहँगा घूमघुमार । ग्वाला गावैं उछर-उछर ढोलक झाँझन झनकार, भानुराय की लाली जीवै कीरति की सुकुमार । ब्रह्मा नाँचैं विष्णु नाँचैं नाँचैं शिव त्रिपुरार, तैंतिस कोटी देवता नाँचैं दै दै के जैकार । राधा वृन्दावन की रानी महारानी रस सार, जाको पग चापै चेरो बन रसिया नंदकुमार ॥ ( पे... 226 )