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भक्तांबर मंगल गीता मानतुंग महामुनिराज द्वारा रचित Bhaktamber Mangal Geeta

पावन मंत्र, अर्घ एवं पूजन

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भक्तांबर मंगल गीता मानतुंग महामुनिराज द्वारा रचित Bhaktamber Mangal Geeta

1 027 просмотров · 4 дня назад
पावन मंत्र, अर्घ एवं पूजन
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🙏 पवित्र भक्तांबर मंगल गीता श्रवण 🙏 भगवान आदिनाथ (जिन्हें ऋषभदेव भी कहा जाता है) जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। यह आचार्य मानतुंग द्वारा रचित "भक्तांबर" के संस्कृत रचना का हिंदी में आशुकवि श्री फूलचंद शास्त्री "पुष्पेंदु" खुरई मध्य प्रदेश द्वारा "भक्तांबर मंगल गीता" में अनुवाद किया गया है इस वीडियो में "भक्तांबर मंगल गीता " का शांत, मधुर एवं भक्तिपूर्ण प्रस्तुत किया गया है। आप इसका श्रवण ध्यान, आत्मचिंतन, पूजा एवं आध्यात्मिक साधना के समय कर सकते हैं। इसके प्रभाव से साधक का चित्र प्रसन्नता धारण करता है, पाप नष्ट हो जाते हैं, और आत्मा में पवित्र भावनाओं को संचार होता है 🌿 श्रवण का भाव: शांत मन से भक्तांबर मंगल गीता का श्रवण करें और अपनी श्रद्धा एवं साधना के अनुसार इसका उपयोग करें। आत्मा को एकाग्र करने और आध्यात्मिक वातावरण बनाने में एवं कठिन से कठिन कार्यों को परमात्मा पर आस्था करके एवं उसका हृदय में स्मरण करते हुए करने से आसानी से पूर्ण किया सकता है । 🎧 इस वीडियो का उपयोग: प्रातःकालीन/सायंकालीन साधना ध्यान एवं आत्मचिंतन पूजा-पाठ के समय शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण के लिए यदि आपको यह मंत्र-जाप उपयोगी लगे तो वीडियो को Like 👍, Share ↗️ और Channel को Subscribe 🔔 करें। 🙏 आपके जीवन में शांति, सद्भाव एवं मंगल की भावना बनी रहे। 🙏 🙏 ━━━━━━━ ॐ ━━━━━━━ 🙏 🌸 श्री आदिनाथ जिनेंद्र भगवान 🌸 भगवान आदिनाथ (जिन्हें ऋषभदेव भी कहा जाता है) जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। उन्हें वर्तमान अवसर्पिणी काल की मानव सभ्यता का आदि प्रणेता और मार्गदर्शक माना जाता है। मुख्य जीवन परिचय विवरण • जन्म स्थान: अयोध्या नगरी • माता-पिता: रानी मरुदेवी (माता) और राजा नाभिराय (पिता) • वंश: इक्ष्वाकु वंश (क्षत्रिय कुल) • जन्म तिथि: चैत्र कृष्ण नवमी • चिह्न: बैल (वृषभ) • कुल आयु: चौरासी लाख पूर्व • लंबाई/ऊंचाई: पाँच सौ धनुष प्रमुख योगदान और शिक्षाएँ • षट्क्रियाओं का उपदेश: कल्पवृक्षों के शक्तिहीन होने पर मानव समाज को जीवित रहने के लिए असि (रक्षा), मसि (लेखन), कृषि (खेती), विद्या, वाणिज्य (व्यापार) और शिल्प इन छह कर्मों का ज्ञान दिया। • शिक्षा की शुरुआत: अपनी पुत्री ब्राह्मी को लिपि (अक्षर ज्ञान) और सुंदरी को गणित का ज्ञान देकर महिला शिक्षा व साक्षरता की नींव रखी। • सभ्यता का विकास: लोगों को कला, संगीत, नृत्य, और व्यवस्थित सामाजिक जीवन जीने की कला सिखाई। • दीक्षा और कठोर तपस्या के बाद उन्हें केवल ज्ञान प्राप्त हुआ और अंत में कैलाश पर्वत से उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया। 🙏 ━━━━━━━ ॐ ━━━━━━━ 🙏 भक्तामर स्तोत्र जैन धर्म का एक अत्यंत प्रसिद्ध और चमत्कारी संस्कृत स्तोत्र है, जिसकी रचना आचार्य मानतुंग ने प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की स्तुति के लिए की थी। मुख्य विशेषताएँ • रचनाकार: आचार्य मानतुंग • आराध्य: भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) • कुल श्लोक: 48 • भाषा: संस्कृत • छंद: वसंततिलका महत्व एवं लाभ • जैन मान्यता के अनुसार, इसके प्रत्येक श्लोक में विशेष मंत्र शक्ति निहित है। • भक्त इस स्तोत्र का पाठ शांति, स्वास्थ्य, और आत्मिक उन्नति के लिए करते हैं। • इसे Vidyasagar Ji Maharaj और अन्य जैन आचार्यों द्वारा संकट निवारक और कल्याणकारी माना गया है। 🙏 ━━━━━━━ ॐ ━━━━━━━ 🙏 🙏 Listening to the Sacred Bhaktambar Mangal Geeta 🙏 Lord Adinath (also known as Rishabhdev) is the first Tirthankara of Jainism. The "Bhaktambar Mangal Geeta" is a Hindi adaptation of the Sanskrit "Bhaktambar" (composed by Acharya Mantung) by the Ashukavi (extempore poet) Shri Phoolchand Shastri "Pushpendu" of Khurai, Madhya Pradesh. This video presents a serene, melodious, and devotional rendition of the "Bhaktambar Mangal Geeta." You may listen to it during meditation, introspection, worship, and spiritual practice. Its influence fills the seeker's mind with joy, eradicates sins, and instills sacred sentiments within the soul. 🙏 May peace, harmony, and auspiciousness prevail in your life. 🙏 🙏 ━━━━━━━ Om ━━━━━━━ 🙏 🌸 Lord Adinath Jinendra 🌸 Lord Adinath (also known as Rishabhdev) is the first Tirthankara of Jainism. He is regarded as the primordial pioneer and guide of human civilization in the current Avasarpini era (the era of decline/descending time cycle). 🙏 ━━━━━━━ Om ━━━━━━━ 🙏 The Bhaktamar Stotra is a highly renowned and miraculous Sanskrit hymn of Jainism, composed by Acharya Mantunga in praise of the first Tirthankara, Lord Rishabhdev (Adinath). Key Features • Composer: Acharya Mantunga • Deity: Lord Adinath (Rishabhdev) • Total Verses: 48 • Language: Sanskrit • Meter: Vasantatilaka Naming and First Verse The first word of this hymn is 'Bhaktamar'; hence, it is known as the '*Bhaktamar Stotra*'.