सवाल बहुत थे… चेहरे पर शिकन एक भी नहीं | आंचल मोंगिया
Bhawna Marol
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सवाल बहुत थे… चेहरे पर शिकन एक भी नहीं | आंचल मोंगिया
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Bhawna Marol
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कुछ लोग सवालों से घिरकर अपनी आवाज़ धीमी कर लेते हैं,
और कुछ उन्हीं सवालों के बीच और स्पष्ट होकर सामने आते हैं।
आंचल मोंगिया के साथ यह बातचीत सिर्फ़ उनकी पत्रकारिता या उनकी जर्नी पर नहीं थी—यह उस बेबाक़ी और निर्भीकता को समझने की कोशिश थी, जिसके कारण उन पर सवाल भी उठे, विवाद भी हुए और उनका चैनल तक बैन हुआ।
लेकिन पूरी बातचीत में जिस एक चीज़ ने मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया—वह था उनका ठहराव।
न चेहरे पर कोई शिकन, न बातों में कोई घबराहट, न अपने कहे से पीछे हटने की कोशिश।
सवाल कठिन थे, दौर भी आसान नहीं रहा होगा…
फिर भी जवाबों में वही सहजता और चेहरे पर वही आत्मविश्वास।
यह बातचीत एक पत्रकार से ज़्यादा, उस इंसान को जानने की कोशिश है जो सवालों के घेरे में भी अपनी आवाज़ और अपना स्वभाव नहीं बदलता।