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उत्तराखंड के मूल निवासी, थारू जनजाति का उदय, विकास और समाज#uttrakhandculture #tharu #janjati

A FELLOW TRAVELLER

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उत्तराखंड के मूल निवासी, थारू जनजाति का उदय, विकास और समाज#uttrakhandculture #tharu #janjati

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थारू, नेपाल और भारत के सीमावर्ती तराई क्षेत्र में पायी जाने वाली एक जनजाति है। उत्तराखण्ड के ऊधम सिंह नगर और उत्तर प्रदेश के तराई जिलों में थारू पाये जाते हैं। थारू जनजाति का एक समृद्ध इतिहास है, जो कई सदियों पुराना है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार थारू राजपूत वंश के वंशज माने जाते हैं। राजपूत भारत में वर्तमान राजस्थान से चले गए और नेपाल के तराई क्षेत्र में बस गए। हालाँकि, कुछ विद्वानों का दावा है कि थारू जनजाति की जड़ें हिमालय में हैं। थारू भाषाओं के अलावा, थारू लोग हिंदी के अलावा क्षेत्रीय भाषाएं भोजपुरी, मैथिली और अवधी भाषा भी बोलते हैं। थारू लोग अपनी संस्कृति का आनन्द लेते हैं। दशैन और तिहार के अलावा, थारू माघी, जितिया और अन्य त्योहारों को धूमधाम और परिस्थितियों के साथ मनाते हैं। आज के इस आधुनिक युग में भी थारू समाज अपने रीति रिवाजों औऱ संस्कृति को सहेजे हुए है। पिछले हफ्ते खटीमा, नानकमत्ता और चकरपुर क्षेत्र के थारू बाहुल्य गांवों में जाकर उनके समाज को नजदीक से जानने की कोशिश की , बड़े सयाने लोगों द्वारा उनके तीज त्योहारों , धार्मिक कर्मकांडों और विवाह परंपराओं को जाना। इन सबको वीडियो के माध्यम से पिरो कर आपके सामने लाने की एक कोशिश की है। वीडियो पसन्द आये तो वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए, और आप लोगों में से जो लोग थारू समाज के बारे में ज्यादा नही जानते, ये जानकारी आपके लिए रोचक हो सकती है। C.S PANDEY A FELLOW TRAVELLER