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दु:ख का मुल कारण : 03 । चंद्रपुभु जिनालय गायरियावास , उदयपुर

​Samyak Life

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दु:ख का मुल कारण : 03 । चंद्रपुभु जिनालय गायरियावास , उदयपुर

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कक्षा 03 दुख का कारण एवं उसका उपाय समस्‍या को हल करने के लिए उसकी जड़ तक जाना होगा शरीर में दर्द हो रहा है और skin पर स्‍प्रे लगा दिया यह सही समाधान नही है हम इच्‍छा को खत्‍म नही कर सकते तो क्‍या करे स्‍वयं से पूछे हमारे दुख का कारण व्‍यक्ति या वस्‍तु नहीं हो क्‍योंकि वह समय दुख रूप नहीं लगते कभी कभी लगते है तो व्‍यक्ति वस्तु या परिस्‍थिति हमें कभी कभी दुख रूप लगते है इसका मनोवैज्ञानिक कारण क्‍या है इसके लिए खोज कीजिये की इच्‍छा क्‍यों हो रही है उसका कारण क्‍या है ( कहां न समस्‍या को समझने से आधा समाधान मिल जाता है ) आप अपने घर को सजाने की इच्‍छा रखते है या दूसरे के आप अपने बेटे से इच्‍छा रखते है दूसरे से तो हमे पता चलता है इच्‍छा तभी होती है जहां अपनापन होता है अपनापन अर्थात् ममत्‍व , अटैचमैंट आपने सुना की दोस्‍त के बेटे का एक्‍सीडैंट हुआ और आपके बेटे को थोडी सी लगी है ज्‍यादा चिंता किसके लिए होगी स्‍वाभाविक सी बात है स्‍वयं के बेटे के लिए इससे एक बात और पता चलती है जितना ज्‍यादा अपनापन उतना ज्‍यादा दुख किसी व्‍यक्ति का तलाक हुआ और उसके बाद उसे पता चलता है कि उसकी पूर्व पत्‍नी के साथ दुर्घटना हो गई अब सोचे जब साथ रहते थे अपनापन था और जब साथ नहीं रहते अपनापन नहीं था वह व्‍यक्ति कहां दुखी होगा और उसे फर्क ही नहीं पड़ेगा अर्थात अपनापन खत्‍म तो दुख खत्‍म अपनापन अर्थात ममत्‍व बुद्धि इसके साथ 3 बुद्धि एकत्‍व कर्तत्‍व भोगत्त्‍व बुद्धि भी होती है एकत्‍व ( शरीर ही मैं हूँ इस प्रकार का believe भोगत्‍व ( मैं धन दोलत स्‍त्री आदि का भोग करता हॅूं इस प्रकार की बुद्धि believe कर्तत्‍व ( मैं नहीं करू तो घर कैसे चलेगा समाज कैसे चलेगा इस प्रकार का believe