Перейти к содержимому

मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक - १० | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी

Shree Chaitanya Ram

0:00 / 0:00

मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक - १० | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी

3 693 просмотра · 1 год назад
Shree Chaitanya Ram
19,6 тыс. подписчиков
3 693 просмотра · 1 год назад
सदा सर्वदा प्रीती रामीं धरावी। दुःखाची स्वयें सांडी जीवी करावी॥ देहेदु:ख ते सूख मानीत जावे। विवेके सदा स्वस्वरुपीं भरावें॥१०॥