Dev Samaj Ki Adalat | Mahasu Devta Ki Nyay Vyavastha | Jaunsar-Bawar: The Land of Justice | Part 2
India Beyond и ещё 2
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Dev Samaj Ki Adalat | Mahasu Devta Ki Nyay Vyavastha | Jaunsar-Bawar: The Land of Justice | Part 2
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जहाँ भगवान खुद चुनते हैं वकील, जहाँ एक रुपये से शुरू होती है न्याय की अर्जी और जहाँ सदियों पुरानी न्याय व्यवस्था आज भी लोगों की आस्था का हिस्सा है।
जौनसार-बावर—टौंस नदी और देवदार के घने जंगलों के बीच बसा वह इलाक़ा, जहाँ महासू देवता को केवल पूजा नहीं जाता, बल्कि उनका अपना दरबार और न्याय व्यवस्था भी मानी जाती है।
इस डॉक्यूमेंट्री में हम जानेंगे महासू देवता की उस न्याय परंपरा को, जो स्याणाचारी, खुमड़ी, खत और चौंतरू जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से पीढ़ियों से चली आ रही है।
इस फिल्म में
खंड 1 · स्याणाचारी: चार स्याणे, एक व्यवस्था 00:15
चार स्याणे, चौंतरू, खुमड़ी और जागा से शुरू होने वाली सामुदायिक न्याय प्रक्रिया और महासू के दरबार तक पहुँचने वाली व्यवस्था।
खंड 2 · एक रुपये का न्याय 05:17
महासू के दरबार में अर्जी, कसम, गवाही और आस्था के माध्यम से न्याय पाने की परंपरा। आखिर क्या है एक रुपये का न्याय?
खंड 3 · हनोल: पुरातत्व और आस्था के साक्ष्य 08:49
अखंड ज्योति, कश्मीर से आए नरगिस के फूल, दो पत्थर और हनोल मंदिर परिसर की खुदाई में मिले प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों से जुड़ी मान्यताएँ।
खंड 4 · एक परंपरा, बदलता समय 10:13
जौनसार-बावर की बदलती सामाजिक परंपराएँ, विवाह, पहनावा, बूढ़ी दिवाली और बदलते समय के बीच महासू में कायम विश्वास।
यह सिर्फ़ एक देवता या मंदिर की कहानी नहीं है।
यह कहानी है न्याय, आस्था, समाज और एक ऐसी जीवित परंपरा की, जो बदलते समय के बीच भी अपनी जगह बनाए हुए है।
कौन हैं स्याणे और चौंतरू?
क्या है एक रुपये का न्याय?
महासू का दरबार कैसे फैसला करता है?
और क्यों आज भी लोग अपना अंतिम फैसला महासू महाराज पर छोड़ देते हैं?
आइए, जानते हैं—
जय चार महासू देवता।
Indian Beyond
Exploring the stories, cultures and histories of India.
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