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जात-पात के चक्कर में, हो गया बर्बाद । Jesus Christ hindi new song. #jesus #jesusloves #viralvideo

LIFE 0.1

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जात-पात के चक्कर में, हो गया बर्बाद । Jesus Christ hindi new song. #jesus #jesusloves #viralvideo

353 просмотра · 2 дня назад
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1. शुरुआत प्रिय भाइयों और बहनों, आज हम एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे हैं, जो हमारे समाज के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यह विषय है — जाति के नाम पर होने वाला भेदभाव और उससे लोगों को मिलने वाली तकलीफ़। हमारे समाज में बहुत समय तक कुछ लोगों को उनकी जाति के कारण नीचा समझा गया। जिन्हें आज हम दलित समुदाय के लोगों के रूप में जानते हैं, उनमें से अनेक लोगों को अपमान और अन्याय का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर उन्हें सार्वजनिक कुओं से पानी लेने, मंदिरों में प्रवेश करने, शिक्षा प्राप्त करने और समाज में बराबरी का स्थान पाने में बाधाओं का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों को उनकी जाति के कारण अलग बैठाया जाता था और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता था। लेकिन मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, क्या परमेश्वर ने किसी इंसान को दूसरे इंसान से छोटा बनाकर भेजा है? क्या किसी की जाति उसके सम्मान को निर्धारित करती है? बिल्कुल नहीं! 2. जाति के नाम पर होने वाला अन्याय इतिहास में अनेक स्थानों पर जाति-व्यवस्था के कारण लोगों को कठिनाइयाँ सहनी पड़ीं। कुछ लोगों को ऐसे काम करने के लिए मजबूर किया जाता था, जिन्हें समाज के दूसरे लोग नहीं करना चाहते थे। शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुँच में भी भेदभाव देखने को मिलता था। इस अन्याय ने अनेक परिवारों के जीवन को प्रभावित किया। बच्चों को पढ़ने के अवसर नहीं मिले, मेहनत करने वाले लोगों को उचित सम्मान नहीं मिला और कई लोगों को अपनी पहचान के कारण अपमान सहना पड़ा। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति का सम्मान उसके काम, जाति या आर्थिक स्थिति से कम नहीं होता। हर इंसान सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और समान अवसर पाने का हकदार है। 3. यीशु मसीह की शिक्षा क्या कहती है? बाइबल हमें प्रेम, दया और दूसरों का सम्मान करना सिखाती है। गलातियों 3:28 में पौलुस बताते हैं कि मसीह यीशु में सभी एक हैं। इस वचन की शिक्षा हमें यह समझने में मदद करती है कि जाति और सामाजिक पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति को कमतर नहीं समझना चाहिए। यीशु मसीह ने उन लोगों के साथ भी प्रेम और करुणा का व्यवहार किया, जिन्हें समाज के कई लोग तुच्छ समझते थे। उन्होंने बीमारों, गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता की और लोगों को प्रेम करना सिखाया। इसलिए यदि हम यीशु को अपना उद्धारकर्ता मानते हैं, तो हमें भी हर व्यक्ति के साथ आदर, दया और न्याय का व्यवहार करना चाहिए। 4. क्या किसी इंसान को अछूत कहना सही है? नहीं, किसी इंसान को उसकी जाति के कारण अछूत समझना या उसके साथ अपमानजनक व्यवहार करना गलत है। हम सब एक ही मानव परिवार का हिस्सा हैं। किसी को पानी से वंचित करना, स्कूल में अलग बैठाना, सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोकना या जाति के कारण अपमानित करना उसकी गरिमा के विरुद्ध है। भारत का संविधान भी अस्पृश्यता को समाप्त करता है और कानून के सामने समानता का अधिकार देता है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने घरों, गाँवों, चर्चों और समाज में ऐसी सोच को बदलें। बच्चों को सिखाएँ कि किसी का मजाक उसकी जाति के कारण नहीं उड़ाना चाहिए और किसी के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। 5. यीशु का प्रेम सबके लिए है मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, यीशु का प्रेम किसी एक जाति या समुदाय तक सीमित नहीं है। उनका संदेश हमें दूसरों के दुख को समझना, जरूरतमंदों की मदद करना और अन्याय के विरुद्ध खड़े होना सिखाता है। यदि कोई व्यक्ति वर्षों से अपमान सह रहा है, तो उसे केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं कि परमेश्वर उससे प्रेम करता है। हमें अपने व्यवहार से भी प्रेम दिखाना चाहिए। किसी बच्चे को शिक्षा में सहायता देना, किसी जरूरतमंद परिवार का साथ देना, भेदभाव के शिकार व्यक्ति की बात सुनना और सबको समान सम्मान देना — ये सभी प्रेम के व्यावहारिक उदाहरण हैं। मत्ती 22:39 में यीशु की शिक्षा है कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करो। यदि हम इस शिक्षा को अपने जीवन में अपनाएँ, तो हमारे परिवारों और समाज में बड़ा बदलाव आ सकता है। 6. जाति नहीं, इंसानियत को महत्व दें आज हमें अपने आप से एक सवाल पूछना चाहिए: क्या हम किसी व्यक्ति को उसके चरित्र और व्यवहार से पहचानते हैं, या उसकी जाति से? अगर हम किसी व्यक्ति की जाति पूछकर उससे दूरी बनाते हैं, तो हमें अपने विचारों पर चिंतन करना चाहिए। किसी की जाति उसे छोटा नहीं बनाती। किसी की गरीबी उसे कम मूल्यवान नहीं बनाती। और किसी की सामाजिक स्थिति उसके सम्मान को समाप्त नहीं करती। आइए, हम ऐसी पीढ़ी तैयार करें जो सभी को साथ लेकर चले। जहाँ हर बच्चा पढ़ सके, हर परिवार सम्मान से जीवन जी सके और किसी व्यक्ति को अपनी जाति के कारण अपमानित न होना पड़े। 7. समाज के लिए हमारा संदेश आज हमारा संदेश स्पष्ट है: जाति के आधार पर किसी से भेदभाव मत करो। हर व्यक्ति को शिक्षा और सम्मान पाने का अवसर दो। अन्याय देखकर चुप मत रहो; शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से सहायता करो। यीशु मसीह की प्रेम और क्षमा की शिक्षा को अपने जीवन में अपनाओ। अपने बच्चों को समानता, दया और इंसानियत की शिक्षा दो। हमारा विश्वास केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे कार्यों में भी दिखाई देना चाहिए। 8. समापन प्रार्थना हे हमारे स्वर्गीय पिता परमेश्वर, हम आपके सामने प्रार्थना करते हैं कि हमारे दिलों से जाति के आधार पर भेदभाव करने वाली सोच को दूर कीजिए। हमें हर इंसान से प्रेम करना, दूसरों का सम्मान करना और दुखी लोगों की सहायता करना सिखाइए। जिन लोगों ने अन्याय और अपमान सहा है, उन्हें न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिले। हमारे गाँव, हमारे परिवार और हमारे समाज में प्रेम, एकता और समानता बढ़ाइए। हमें ऐसा जीवन जीने की शक्ति दीजिए, जिससे आपके प्रेम की गवा प्रभु यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना करते हैं। आमीन। ‪@AnkurNarulaMinistries‬ ‪@AnkitSajwanMinistries‬ ‪@utcchurch‬ ‪@sunnyvishwasofficial‬