🪷भाजे बौद्ध गुफाए ।एक भी बुद्ध मूर्ती क्यो नहीं ? #BhajaCaves #BuddhistCaves #AncientIndia
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भाजे बौद्ध गुफाए (Bhaje Buddhist Caves)| एक भी बुद्ध मूर्ती क्यो नहीं ।थेरयान महायान क्या अंतर है । भाजे गुफाएं (Bhaje Caves) महाराष्ट्र राज्य के पुणे जिले के मावल तालुका में लोणावला के पास स्थित हैं। ये गुफाएं सह्याद्री पर्वत श्रृंखला की एक पहाड़ी की ढलान पर स्थित हैं और मलवली रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर हैं।
कालखंड:
भाजे गुफाओं का निर्माण लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। ये गुफाएं भारत की सबसे प्राचीन बौद्ध गुफाओं में से एक मानी जाती हैं और इनका संबंध हीनयान( Theryan) बौद्ध परंपरा से है।
मुख्य विशेषताएं:
1. चैत्यगृह (गुफा संख्या 12)
यह सबसे प्रमुख और भव्य गुफा है। इसमें एक अर्धवृत्ताकार छत और लकड़ी से बनी छत के स्तंभों के अवशेष अब भी दिखाई देते हैं। इस गुफा में एक स्तूप (स्तूप चैत्य) है, जो साधना और ध्यान का मुख्य केंद्र रहा है। यह भारत के सबसे पुराने बौद्ध प्रार्थना हॉलों में से एक है।
2. विहार (मठ)
गुफा समूह में कई विहार हैं, जिनका उपयोग भिक्षुओं के निवास स्थान के रूप में होता था। इनमें छोटे-छोटे कमरे बने हैं।
3. स्तूप समूह (खुदाई संख्या 20)
गुफाओं के पास एक स्थान पर 14 छोटे स्तूपों का समूह है। ये स्तूप विभिन्न बौद्ध भिक्षुओं और शिक्षकों को समर्पित हैं। कुछ स्तूपों पर ब्राह्मी लिपि में inscriptions (लेख) भी पाए गए हैं।
4. शिलालेख
गुफाओं में पाए गए कई लेख ब्राह्मी लिपि ( धम्मलिपी ) में लिखे गए हैं। एक शिलालेख में उल्लेख है: “विनुदाता, कोसिकी पुत्र द्वारा जलकुंड का दान।”एक अन्य शिलालेख में है: “धामाभाग का समर्पण।”
5. जलकुंड (Excavation No. 19)
यह एक प्राकृतिक जलकुंड है जिसे चट्टान को काटकर बनाया गया है। इसका उपयोग वर्षा जल संचयन और भिक्षुओं की आवश्यकताओं के लिए किया जाता था।
6. Yaksha-Yakshi मूर्तियां चैत्यगृह के प्रवेश द्वार पर एक सुंदर यक्षी (Yakshi) की मूर्ति है जो कमल के तने पर खड़ी दिखाई गई है। यह मूर्ति अद्भुत शिल्पकला का उदाहरण है।
स्थापत्य कला:-भाजे गुफाएं रॉक-कट आर्किटेक्चर का बेहतरीन उदाहरण हैं। यह गुफाएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्थापत्य और कलात्मक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
धार्मिक महत्व:-भाजे गुफाएं बौद्ध धर्म के हीनयान संप्रदाय से संबंधित हैं, जिसमें बुद्ध की मूर्ति की पूजा न होकर, स्तूप और प्रतीकों की पूजा की जाती थी।
पर्यटन और संरक्षण:-आज ये गुफाएं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित हैं और लोणावला आने वाले पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय दर्शनीय स्थल हैं। यहां से पास महायान बुद्धिस्ट कार्ला गुफाएं भी देखने योग्य हैं।
बौद्ध धर्म, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित एक महान धर्म है, जो समय के साथ कई शाखाओं में विभाजित हुआ। इनमें दो प्रमुख शाखाएं हैं – थेरवाद (Theravāda) और महायान (Mahāyāna)। दोनों परंपराओं का उद्देश्य दुखों से मुक्ति और आत्मज्ञान की प्राप्ति है, लेकिन उनके रास्ते, दृष्टिकोण और विश्वासों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं।
थेरवाद :- थेरवाद का अर्थ है “बुजुर्गों की परंपरा”। यह बौद्ध धर्म की सबसे पुरानी और पारंपरिक शाखा मानी जाती है। थेरवाद यह मानता है कि मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग कठिन साधना, ध्यान और संयमित जीवन से होकर जाता है। इसमें एक साधक स्वयं के उद्धार के लिए प्रयास करता है और “अरहंत” बनकर जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।
महायान :- महायान का अर्थ है “महान वाहन”। यह परंपरा लगभग पहली शताब्दी ईस्वी में विकसित हुई। महायान का लक्ष्य केवल स्वयं की मुक्ति नहीं, बल्कि सभी प्राणियों की मुक्ति है। इस परंपरा में बौद्ध अनुयायी “बोधिसत्व” बनने का प्रयास करते हैं — ऐसे प्राणी जो ज्ञान प्राप्त करने के बाद भी दूसरों की मदद के लिए संसार में रहते हैं।
थेरवाद में ध्यान और तपस्वी जीवन पर ज़ोर दिया जाता है, जबकि महायान में करुणा और सामूहिक मुक्ति पर।
• थेरवाद में आदर्श व्यक्ति अरहंत होता है, जिसने स्वयं निर्वाण पाया हो, जबकि महायान में आदर्श बोधिसत्व होता है, जो दूसरों की मुक्ति में सहायता करता है।थेरवाद में ग्रंथ पाली भाषा में हैं, जबकि महायान में अधिकांश ग्रंथ संस्कृत और तिब्बती में।महायान परंपरा में बुद्ध की मूर्तियाँ अधिक भव्य और प्रतीकात्मक होती हैं, जबकि थेरवाद में सरल और पारंपरिक।
सूर्य गुफा, भाजे गुफा समूह की एक विशिष्ट गुफा है, जिसे उसके अंदर पाए जाने वाले सूर्य देवता की आकृति के कारण यह नाम दिया गया है। यह गुफा वास्तुकला, मूर्तिकला और धार्मिक प्रतीकों का सुंदर संगम है।
गुफा की दीवारों या स्तंभों पर सूर्य देवता की आकृति खुदी हुई है। यह सूर्य को एक दिव्य रथ पर सवार दिखाया गया है, जो चार घोड़ों द्वारा खींचा जाता है — यह चित्रण हिंदू और बौद्ध कला का सम्मिलित रूप दर्शाता है। यद्यपि भाजे गुफाएं मूलतः बौद्ध धर्म से संबंधित हैं, सूर्य गुफा जैसी संरचनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि उस समय की धार्मिक जीवनशैली में हिंदू और बौद्ध मान्यताओं का समन्वय था|
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