Alakh Niranjan Aadesh (Original Edition) | अलख निरंजन आदेश | Mahakal Shiv Gorakh Rap
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Alakh Niranjan Aadesh (Original Edition) | अलख निरंजन आदेश | Mahakal Shiv Gorakh Rap
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अलख निरंजन! आदेश! आदेश! 🔱🔥
शून्य शिखर से आया नाथ संप्रदाय का उद्घोष —
"अलख निरंजन" — नाथ योगियों का वह पारंपरिक अभिवादन जो सदियों से
गुरु मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गोरखनाथ की परंपरा में गूंजता आया है।
यह ट्रैक महाकाल, शिव के अघोर रूप, और नाथ योगियों की उस साधना को
समर्पित है जहाँ भय मिटता है और भीतर का शिवत्व जागता है।
हर हर महादेव 🙏
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पूरे बोल:
शून्य से शिखर तक, शिव का विस्तार
कण-कण में गूँजे भोले का नाम
धूनी जले, जागे संसार
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
शिव ही सत्य! आदेश! आदेश!
हर हर महादेव, गूँजे आकाश
टूटे मोह के सारे पाश
आदेश! आदेश! आदेश!
जटा में गंगा, माथे चंदा
कंठ में विष, फिर भी मुख मंदा
भस्म रमाए, नाग सजाए
भोले सबके भाग्य जगाए
त्रिशूल उठे तो काल भी काँपे
डमरू बजे तो लोक भी जागे
अघोर के स्वामी, योगी महान
शिव के चरणों में मेरा प्रणाम
धूनी की राख में शक्ति अपार
शिव का नाम ही मेरा हथियार
जो भी आया शरण तुम्हारी
उसकी नैया तूने तारी
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
हर हर शंभू! आदेश! आदेश!
कर्मों का लेखा कौन मिटाए
महाकाल जब दृष्टि उठाए
अंधकार का टूटे राज
शिव नाम बने मेरा कवच आज
ॐ रं रं रं... हूं... फट्!
महाकाल की शक्ति प्रकट!
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
शिव ही सत्य! आदेश! आदेश!
जहाँ गूँजे महादेव का नाद
मिट जाए मन का हर विषाद
आदेश! आदेश! आदेश!
हर हर महादेव!
मोह की जंजीरें टूटती जाएँ
अघोर अग्नि में पाप जलाएँ
नाम शिव का जब भीतर उतरे
डर के सारे दरवाज़े टूटें
भैरव चले शिव के संग-संग
गूँजे नभ में डमरू की धुन
गोरख जागे, धूनी धधके
काल भी देखे और कदम थमके
ना मैं देह, ना झूठा मान
शिव का अंश, यही पहचान
ना धन माँगूँ, ना राज-पाट
बस भोले रखना अपना हाथ
शब्द सांचा! पिंड काचा!
ईश्वरो वाचा! सत्य की वाचा!
कौन है रखवाला?
महाकाल! महाकाल!
कौन मिटाए काल?
महाकाल! महाकाल!
किसका नाम आधार?
भोलेनाथ! भोलेनाथ!
किसकी शक्ति अपार?
महादेव! महादेव!
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
जब संकट आए, शिव को पुकारूँ
हर सांस में तेरा नाम उचारूँ
वीर बजरंगी साथ खड़े हों
राम नाम से भय सब झड़े हों
भय का बंधन पल में कटे
दोष अंधेरा दूर हटे
रिद्धि-सिद्धि आँगन में आएँ
अन्नपूर्णा भंडार सजाएँ
गुरु की वाणी दीप समान
उसमें दिखता ब्रह्म महान
जो कुछ मेरा, तेरे हवाले
भोले तू ही मेरे रखवाले
ॐ क्रीं हूं फट्!
पाप-कर्म सब भस्म!
स्वाहा! आदेश! आदेश!
एक ज्योति, एक ही सार
शिव में छुपा ये संसार
घट में शिव और शिव में घट
भीतर देखो, हटेगा पट
माया का पर्दा जब हट जाए
मन अपना शिवरूप दिखाए
जन्म-जन्म के बंधन टूटें
शिवत्व के द्वार भीतर खुलें
ॐ शिव गोरक्ष!
आदेश! आदेश!
अलख निरंजन! आदेश! आदेश!
शिव ही सत्य! आदेश! आदेश!
हर हर शंभू, गूँजे आकाश
मिट जाए मन का हर संताप
धूनी जले!
डमरू बजे!
महाकाल का नाम सजे!
ॐ शिव गोरक्ष!
ॐ नमः शिवाय!
अलख निरंजन!
आदेश! आदेश! आदेश! आदेश!
शिव ही ज्योति...
शिव ही सार...
शिव ही नाव...
शिव ही पार...
अलख निरंजन...
आदेश... आदेश...
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ABOUT ALAKH NIRANJAN:
"Alakh Niranjan" is the traditional greeting used by yogis of the Nath
Sampradaya (Nath tradition) — founded by Guru Matsyendranath and carried
forward by Guru Gorakhnath, the pioneer of Hatha Yoga. The phrase means
roughly "the formless, unstained one," invoking Shiva as pure, attributeless
consciousness. This track blends that yogic invocation with Aghor and Bhairav
imagery, and the bij mantras associated with Mahakal worship.
Masik Shivratri (monthly Shivratri) falls on Krishna Paksha Chaturdashi every
month — the next one is 8-9 October 2026. Mahashivratri, the year's most
significant observance, will next fall on Saturday, 6 March 2027.
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