Digi Arden—सदाबहार सुनहरे गीतों की महफ़िल Episode 4 “मेरे सपनों की रानी” दार्जिलिंग की टॉय ट्रेन...
Digi Arden
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Digi Arden—सदाबहार सुनहरे गीतों की महफ़िल Episode 4 “मेरे सपनों की रानी” दार्जिलिंग की टॉय ट्रेन...
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तो दोस्तों…
आज की हमारी “सदाबहार सुनहरे गीतों की महफ़िल” में हमने फिर एक बार उस दौर की ट्रेन पकड़ ली…जिसमें सफर भी था…संगीत भी था…पहाड़ भी थे…और प्यार भी।
अब आप बताइए—अगर आपको आज किसी ट्रेन के साथ दौड़कर अपनी “सपनों की रानी” को एक गीत सुनाना हो…तो कौन-सा गीत सुनाएँगे?
1969 से आज तक अब ज़रा सोचिए…1969 में आया यह गीत…आज भी जब बजता है…
तो कितने लोग अनायास मुस्कुरा देते हैं। क्यों? क्योंकि यह सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं है।यह एक दौर की याद है। यह राजेश खन्ना की वो खास अदा है…
यह किशोर दा की वो बेफिक्र आवाज़ है…यह दार्जिलिंग की वो ट्रेन है…और यह उस दौर का वो रोमांस है…जहाँ किसी को पसंद करना भी एक खूबसूरत कहानी हुआ करता था।
“मेरे सपनों की रानी” ने राजेश खन्ना की लोकप्रियता को आसमान तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
और किशोर कुमार की आवाज़ ने उनके स्क्रीन व्यक्तित्व को ऐसी पहचान दी…
जो आज भी लोगों के दिल में ज़िंदा है। और लय की लगातार चलती हुई गति…सब मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जिसमें आपको लगता है—ट्रेन सिर्फ पटरी पर नहीं चल रही…
हमारा दिल भी उसके साथ दौड़ रहा है। और आनंद बख्शी के शब्द कितने सीधे हैं—
“मेरे सपनों की रानी, कब आएगी तू…”सिर्फ एक सवाल…लेकिन इस एक सवाल में कितनी बेचैनी छिपी है!
हर उस नौजवान का सवाल…जिसके जीवन में कभी कोई “सपनों की रानी” आई हो…
या आने का इंतज़ार हो।