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109. कुंडली में निसंतान योग: संतान प्राप्ति में बाधाएं |Vedic Astrology | ज्योतिष सीखें

Akshar Jyotish | ज्योतिष सीखें | Vedic Astrology

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109. कुंडली में निसंतान योग: संतान प्राप्ति में बाधाएं |Vedic Astrology | ज्योतिष सीखें

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Akshar Jyotish | ज्योतिष सीखें | Vedic Astrology
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For personal consultation contact pinki.akshar@gmail.com नमस्कार! अक्षर ज्योतिष में आपका स्वागत है। इस वीडियो में पिंकी अग्रवाल जी ने विस्तार से समझाया है कि कुंडली में किन योगों के कारण संतान प्राप्ति में बाधाएं आती हैं या जातक निसंतान रह सकता है। दो कुंडलियों के गहराई से विश्लेषण के माध्यम से बताया गया है कि जब लग्न, लग्नेश, पंचम भाव, पंचमेश और संतान कारक गुरु ग्रह पीड़ित या त्रिक भावों में स्थित हों तो यह संतान प्राप्ति में विलंब या असंभवता का संकेत हो सकता है। साथ ही चांडाल योग, अंगारक योग, ग्रहण योग और पितृ दोष जैसे विशेष योगों का प्रभाव भी बताया गया है। अंत में यह भी संकेत दिया गया है कि क्षेत्र स्फुट और बीज स्फुट की गणना के माध्यम से संतान संभावनाओं का गहराई से अध्ययन किया जा सकता है, जिसकी चर्चा अगले वीडियो में की जाएगी। 00:10 – निसंतान योग का परिचय और कुंडली में इसके संकेत 01:49 – लग्न और लग्नेश की पीड़ित स्थिति का प्रभाव 03:21 – पंचम भाव, पंचमेश और राहु-शुक्र का प्रभाव 04:40 – गुरु और चंद्रमा की अष्टम भाव में स्थिति का नकारात्मक असर 05:49 – दूसरी कुंडली: लग्नेश और पंचमेश का त्रिक भावों में जाना 07:26 – सिंह राशि में गुरु और शुक्र का प्रवेश: अल्प संतान योग 08:59 – कुंडली 1980: शुक्र स्वराशि में परंतु ग्रहों की पीड़ा 10:11 – विभिन्न दोष: चांडाल योग, अंगारक योग, ग्रहण योग, पितृ दोष 11:12 – पीड़ित ग्रहों के बावजूद युति द्वारा आशा की संभावना 12:15 – पति-पत्नी दोनों की कुंडली में दोष होने पर संतान में बाधा 13:51 – आगे की स्टडी: बीज स्फुट और क्षेत्र स्फुट का परिचय 15:38 – बीज स्फुट और क्षेत्र स्फुट से संतान योग का मूल्यांकन 16:51 – निसंतान योग का सारांश और समापन #Jyotish #Kundli #Astrology #Horoscope #Zodiac #VedicAstrology #astrology2025 #DailyHoroscope #AstrologyForBeginners #AstrologyTips #AstroTalk #learnastrology #संतानयोग #ज्योतिष #santanyog