Radhe Adhadhunda Darbar Rate Ja (राधे अधाधुंध दरबार रटे जा) - (Vrindavan, 1994) || Shri Maharaj Ji
Bishwas Pandey
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Radhe Adhadhunda Darbar Rate Ja (राधे अधाधुंध दरबार रटे जा) - (Vrindavan, 1994) || Shri Maharaj Ji
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Bishwas Pandey
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Shri Maharaj Ji explains how Shri Krishna gains his supreme, soul-attracting nature through the grace of Shri Radha Rani, highlighting the constant chanting of Radhe-Radhe as the ultimate path to spiritual connection.
Book 📖: Braj Ras Madhuri (1)
(Recorded in SSD Hall, 1994)
राधे अधाधुंध दरबार रटे जा राधे-राधे।।
जब हरि शूकर बनि आयो, पृथिवी पताल ते लायो,
कब किन्यो रास विहार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि नृसिंह बनि आयो, शंकरहूँ लखि डरपायो,
कब भईं गोपिन बलिहार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि कच्छप बनि आयो, जलनिधि मंथन करवायो,
कब बजी मुरलि रिझवार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि वामन बनि आयो, बलि बाँधि पताल पठायो,
कब नाच्यो सँग ब्रजनार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि तनु मीन बनायो, वेदन उद्धार करायो,
कब चीर हर्यो ब्रजनार? रटे जा राधे-राधे।
जब हरि राघव बनि आयो, शूर्पणखहिँ नाक कटायो,
कब किये करोरन नार? रटे जा राधे-राधे।
जब राधा ब्रज में आयीं, अरु हरि ने लइ शरणाई, तब भये रसिक सरदार, रटे जा राधे-राधे।
जो राधा नाम न होतो, तो कृष्ण कृष्ण नहिं होतो,
अस मम 'कृपालु' सरकार, रटे जा राधे-राधे।