अकथित कर्म क्या है? | अकथितं च १।४।५१ | 16 द्विकर्मक धातु | लघुसिद्धान्तकौमुदी संस्कृत व्याकरण
Pragya Sanskrit
0:00 / 0:00
अकथित कर्म क्या है? | अकथितं च १।४।५१ | 16 द्विकर्मक धातु | लघुसिद्धान्तकौमुदी संस्कृत व्याकरण
80 просмотров · 11 дн. назад
Pragya Sanskrit
839 подписчиков
80 просмотров · 11 дн. назад
लघुसिद्धान्तकौमुदी | कारक/विभक्त्यर्थप्रकरण | अकथित कर्म
इस वीडियो में “अकथितं च १।४।५१” कर्मसंज्ञाविधायक संज्ञासूत्र का सरल एवं विस्तृत विवेचन किया गया है।
इस वीडियो में जानेंगे:
🔹 अकथितं च १।४।५१ सूत्र
🔹 अकथित कर्म की परिभाषा
🔹 अपादानादि कारकों से अविवक्षित कारक को कर्मसंज्ञा क्यों?
🔹 इष्टतम कर्म और अकथित कर्म में अंतर
🔹 एक क्रिया के दो कर्म कैसे होते हैं?
🔹 16 द्विकर्मक धातु
🔹 दुह्, याच्, पच्, दण्ड्, रुध्, प्रच्छ्, चि, ब्रू, शास्, जि, मथ्, मुष्, नी, हृ, कृष्, वह्
🔹 गां दोग्धि पयः
🔹 बलिं याचते वसुधाम्
🔹 तण्डुलान् ओदनं पचति
🔹 गर्गान् शतं दण्डयति
🔹 व्रजम् अवरुणद्धि गाम्
🔹 माणवकं पन्थानं पृच्छति
🔹 वृक्षम् अवचिनोति फलानि
🔹 माणवकं धर्मं ब्रूते / शास्ति
🔹 शतं जयति देवदत्तम्
🔹 सुधां क्षीरनिधिं मथ्नाति
🔹 देवदत्तं शतं मुष्णाति
🔹 ग्रामम् अजां नयति / हरति / कर्षति / वहति
🔹 अर्थनिबन्धनेयं संज्ञा
🔹 समानार्थक धातुओं में अकथित कर्म का प्रयोग
🔹 बलिं भिक्षते वसुधाम् आदि उदाहरण
यह वीडियो लघुसिद्धान्तकौमुदी, कारक/विभक्त्यर्थप्रकरण, कर्मकारक और Sanskrit Grammar की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।
📚 Pragya Sanskrit पर लघुसिद्धान्तकौमुदी और संस्कृत व्याकरण को सरल एवं क्रमबद्ध तरीके से सीखें।
#अकथितंच #अकथितकर्म #द्विकर्मकधातु #लघुसिद्धान्तकौमुदी #कर्मकारक #संस्कृतव्याकरण #SanskritGrammar #PragyaSanskrit