कभी-कभी चमकती हुई चीज़ सोना नहीं होती, और जल्दबाज़ी में लिए गए फैसले पूरी ज़िंदगी का दर्द बन जाते है
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कभी-कभी चमकती हुई चीज़ सोना नहीं होती, और जल्दबाज़ी में लिए गए फैसले पूरी ज़िंदगी का दर्द बन जाते है
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सिमरन के लिए 'जंडियाला' गांव के एक नामी परिवार से रिश्ता आया। लड़का 'करण' बाहर से बहुत सभ्य और अमीर दिखता था। बिचौलिये और करण के घर वालों ने उसकी बुरी आदतों को छिपाकर सिमरन के परिवार को धोखे में रखा। शादी बेहद धूमधाम से हुई।
लेकिन शादी की पहली ही रात सिमरन का भ्रम टूट गया। करण शराब और चिट्टे (नशे) का बुरी तरह आदी था। नशे की हालत में वह घर का सामान तोड़ता और सिमरन के साथ गाली-गलौज करता।
उसकी सास 'गुरमीत कौर' अपनी ममता में अंधी थीं। वह बेटे का सुधार करने के बजाय सिमरन पर ही दबाव बनाती थीं:
"औरत का काम सहना होता है सिमरन! तू थोड़ा सबर रख, बच्चा हो जाएगा तो सब ठीक हो जाएगा।"