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अर्जुन का मोह चरम पर क्यों पहुँचा? | कर्तव्य और मोह की लड़ाई | गीता अध्याय 1 भाग 3

गीता री चोखी बातां

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अर्जुन का मोह चरम पर क्यों पहुँचा? | कर्तव्य और मोह की लड़ाई | गीता अध्याय 1 भाग 3

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गीता री चोखी बातां
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वीडियो में हम सुनेंगे श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम अध्याय — अर्जुन विषाद योग के तीसरे और अंतिम भाग का सरल हिंदी संस्करण। इस भाग में अर्जुन का विषाद और भी गहरा हो जाता है। राज्य, सुख और विजय की इच्छा से अधिक उसे अपने स्वजनों का मोह दिखाई देने लगता है। वह दुर्योधन आदि के लोभ और विवेकहीनता को तो देख पाता है, लेकिन अपने भीतर के मोह को नहीं पहचान पाता। इस प्रसंग के माध्यम से हम समझेंगे कि दूसरों के दोष देखने में कहीं हम अपने दोषों को तो नहीं भूल जाते? जब मनुष्य मोह और लोभ के वश में होता है, तब उसकी विवेक-बुद्धि किस प्रकार प्रभावित होती है? के साथ अध्याय 1 — अर्जुन विषाद योग पूर्ण होता है। अगले एपिसोड से हम श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय की यात्रा शुरू करेंगे और जानेंगे कि अर्जुन के विषाद के बाद भगवान श्रीकृष्ण उसे कौन-सा अमूल्य ज्ञान देते हैं। इसका मारवाड़ी संस्करण मेरे चैनल “गीतारी चौखी बातां” पर उपलब्ध है। आप वहाँ जाकर इसे सरल मारवाड़ी भाषा में भी सुन सकते हैं। 🙏 गीता केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन को समझने का मार्ग है। आइए, इसके ज्ञान को समझें और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। हरे कृष्ण 🙏 राधे राधे। Hashtags #श्रीमद्भगवद्गीता #भगवद्गीता #अर्जुनविषादयोग #गीता_अध्याय_1 #गीता_अध्याय_1_भाग_3 #अर्जुन_का_मोह #अर्जुन_का_विषाद #कृष्ण_अर्जुन #गीता_ज्ञान #महाभारत #सनातनधर्म #राजर्षि_खट्वांग #BhagavadGita #ArjunaVishadaYoga