श्री लंका में मिले रावण के विशाल पैर? सिगीरिया का सर्प रहस्य | प्रवीण मोहन
Praveen Mohan Hindi
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श्री लंका में मिले रावण के विशाल पैर? सिगीरिया का सर्प रहस्य | प्रवीण मोहन
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क्या आप सिगीरिया में स्थित 'लायन्स पाज यानी शेर का पंजा' नाम से जाने जाने वाली इस अजीब सी संरचना के बारे में जानते हैं? 🤔🤔
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00:00 - रावण का महल!
00:38 - दो विशाल पंजे!
01:34 - ये पंजे किस जानवर के हैं?
03:26 - रावण, एक सरीसृप या रेप्टाइल?
04:26 - रावण में रेप्टिलियन विशेषताएं!
05:38 - श्री लंका as नागद्वीप!
06:43 - कोबरा हुड गुफा, एक अविश्वसनीय संरचना!
07:41 - प्राचीन पेंटिंग के अवशेष!
08:08 - नागु लिया नामक राजा की संपत्ति?
09:45 - निर्माण!
10:28 - निष्कर्ष
हैलो दोस्तों, आज हम सिगीरिया में स्थित एक बहुत ही अजीब सी संरचना को देखने वाले हैं, जिसे लायन्स पाज यानी शेर का पंजा कहा जाता है। सिगीरिया, श्रीलंका में स्थित एक विशाल चट्टान है जिसका शीर्ष चपटा है, और इसे रावण के महल के नाम से भी जाना जाता है।
जब आप सिगीरिया पर चढ़ना शुरू करते हैं, तो ये आमतौर पर सीढ़ियों की एक श्रृंखला है जहां आराम करने के लिए लगभग कोई जगह नहीं है। लेकिन बीच में एक सपाट जगह है जहां लोग ऊपर तक चढ़ने से पहले रुक कर आराम करते हैं।
ये एक बहुत ही दिलचस्प जगह है क्योंकि यहां कुछ विचित्र दिखता है। एक अजीब से जानवर के दो विशाल पंजे बनाए गए हैं यहां। ये बहुत विशाल पैर है, मैंने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा, मेरा मतलब है ये बहुत ही बड़ा है, आप देख सकते हैं
इसकी तुलना में मैं कितना छोटा दिख रहा हूं।
हरेक पंजा कम से कम 10 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा है। मेरा मतलब है कि इसे देख कर गीज़ा के महान पिरामिड में बने स्फिंक्स के विशाल पैरों का खयाल ना आए, ऐसा नहीं हो सकता। इससे भी ज्यादा अजीब बात ये है कि श्रीलंका के लोग इसे लायन्स पॉज या लायन गेट के नाम से जानते हैं जो की आधुनिक मिस्र के लोगों के दावे से मिलता जुलता है क्योंकि वे कहते हैं कि स्फिंक्स का एक भाग शेर का है।
मतलब दोनों पैरों में तीन बड़ी उंगली और एक छोटी उंगली है। श्रीलंका में ये लायन्स पॉज या लायन इंट्रेंस के नाम से लोकप्रिय है क्योंकि कई विशेषज्ञ दावा करते हैं कि इन पैरों की उंगलियां शेर की है। लेकिन ये बिलकुल गलत है, ये शेर के पंजे नहीं हैं।
शेर के पैरों में चार नहीं बल्कि पांच उंगलियां होती हैं, शेर के जैसे और भी स्तनधारी जानवरों में जैसे कि बाघ के पैरों में
भी पांच उंगलियां होती हैं, ना कि चार। प्राचीन निर्माताओं ने साफ तौर पर तीन बड़ी उंगलियों को और एक छोटी उंगली
को दिखाया है।
तो ये पंजे किस जानवर के हैं? प्राचीन सरीसृपों या रेप्टाइल्स की चार उंगलियां होती थी, ज्यादातर उनकी तीन बड़ी उंगलियां और एक छोटी उंगली होती थी। चलिए उदाहरण के लिए डायनोसोर को देखते हैं, आप अभी टी रेक्स के पंजों को देख रहे हैं।
इसकी चार उंगलियां हैं, तीन बड़ी और एक छोटी सी, इनमें समानता को देखिए।
इसके टखने पर जो खुरदरे स्केल्स हैं, उस पर ध्यान दीजिए। प्राचीन निर्माताओं ने सिगीरिया में इन स्केल्स को भी दिखाने की कोशिश की है, संरचना पर बने इन लहरदार लाइन्स को देखिए, ये स्केल्स को दर्शाती है। ये निश्चित रूप से किसी प्राचीन रेप्टाइल को दर्शाता है। वो शक्तिशाली रेप्टाइल क्या है?
कोई और नहीं बल्कि खुद रावण। अब, रावण को श्रीलंका का सबसे महान राजा माना जाता है, इतना महान की श्रीलंका के
पहले उपग्रह का नाम रावण रखा गया। सिगीरिया को रावण के महल के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन, रावण एक सरीसृप या रेप्टाइल कैसे हो सकता है? उसके ऐसे पैर कैसे हो सकते हैं?
लेकिन जब हम प्राचीन ग्रंथो को पढ़ते हैं, तो अजीब से विवरण सामने आते हैं। पहली बात, रावण पूरी तरह से मनुष्य नहीं था, सिर्फ उसके पिता मानव थे। उनकी मां पूरी तरह से एक अलग प्रजाति की थीं, शायद एक रेप्टीलियन। जब रावण का जन्म हुआ था तब उसके गुण एक हाइब्रिड प्रजाति के थे, पश्चिमी देशों में इन हाइब्रिड प्रजाति को नेफिलीम कहते हैं, कुछ मायनों में वह मनुष्य था और कुछ में मनुष्य नहीं था, सुपर ह्यूमेन था।
उदाहरण के लिए, रावण के बारे में एक बात प्रसिद्ध है कि वो विशालकाय था, वो लगभग दस फीट लंबा था। लेकिन रावण में और भी रेप्टिलियन विशेषताएं थीं, वो आकार बदलने में सक्षम था, वो अपने रूप को बदल कर दूसरों को धोखा दे सकता था, वो आधुनिक दिन के गिरगिट की तरह आसपास के वातारण में ब्लेंड होकर अदृश्य भी हो सकता था।
थाईलैंड के टेक्स्ट रामाकियेन में इस बात का वर्णन है कि रावण की त्वचा हरे रंग की थी, एक गिरगिट की तरह। मानव त्वचा हरे रंग की नहीं हो सकती, उसके अन्दर निश्चित रूप से रेप्टिलियन खून था। श्रीलंका में, कुछ रेप्टाइल्स का नाम रावण के नाम पर रखा गया है।
उदाहरण के लिए, इस सांप को रावणागे मेडिल्ला कहते हैं और इसका वैज्ञानिक नाम भी अस्पिडूरा रावनाई है, जो कि रावण के नाम पर रखा गया है क्योंकि वो रेप्टिलियन वंश का था। मेरे श्रीलंका के यात्रा के दौरान, मैंने कई सपेरों को देखा जो खुद को रावण के वंशज मानते हैं, और वो कहते हैं कि रावण का जन्म नागा वंश में हुआ था।
आज हम सोंचते हैं कि नागा शब्द का मतलब सिर्फ सांप है, लेकिन ये सपेरे कहते हैं कि इनके मूल पूर्वज दो पैरों और दो हाथों वाले ह्यूमेन्वाइड(मानव सदृश) थे, लेकिन उनके पास आकार बदलने जैसी दिव्य शक्तियां थीं और वे अदृश्य भी हो सकते थे।
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