प्यारे गोविन्द ब्रज रखवारे | ब्रज की प्राचीन लोक तान | ब्रजभाषा माधुर्य | Namamritam
नामामृतम्
0:00 / 0:00
प्यारे गोविन्द ब्रज रखवारे | ब्रज की प्राचीन लोक तान | ब्रजभाषा माधुर्य | Namamritam
1 883 просмотра · 4 дня назад
नामामृतम्
202 подписчика
1 883 просмотра · 4 дня назад
प्यारे गोविन्द ब्रज रखवारे | ब्रज की प्राचीन लोक तान | कवि गोविन्द जी | Namamritam
“प्यारे गोविन्द ब्रज रखवारे, तोही पे गाय दुहानी है।”
ब्रज की प्राचीन लोक तान में गाया जाने वाला यह अत्यंत मधुर ब्रजभाषा पद कवि श्री गोविन्द जी की रचना है। यह पद ब्रज की गोपियों और उनके प्यारे नन्दलाल श्रीकृष्ण के बीच सहज प्रेम, आत्मीयता और मधुर लीला का सुंदर चित्रण करता है।
इस पद में ब्रज की गोपियाँ श्रीकृष्ण से अपनी गायें दुहने के लिए आने की विनती करती हैं। वे कहती हैं कि उनकी गायें केवल कान्हा की किटकारी (विशेष पुकार) पहचानती हैं और किसी दूसरे की नहीं सुनतीं।
“तेरी किटकारी मानें, और काहू कौ न जानें,
याकी कैसे कढ़ेगी पय की धार रे।”
गोपियों का यह आग्रह केवल गाय दुहने के लिए नहीं, अपितु अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के दर्शन और सान्निध्य की उत्कट अभिलाषा का भी परिचायक है।
ब्रज की लोक संस्कृति, गोचारण लीला और गोपियों के सहज प्रेम से ओतप्रोत यह पद ब्रज की प्राचीन संगीत परंपरा की अनमोल झलक प्रस्तुत करता है।
प्रस्तुति विवरण
तान रचनाकार: कवि श्री गोविन्द जी
गायन परंपरा: अखाड़ा-टीला (Akhada-Teela)
संगीत शैली: ब्रज की प्राचीन लोक तान
भाषा: ब्रजभाषा
प्रस्तुति: Namamritam
हमारा प्रयास है कि ब्रज की प्राचीन लोक तानों, दुर्लभ पदों और पारंपरिक भक्ति संगीत को संरक्षित करते हुए अधिक से अधिक रसिक भक्तों तक पहुँचाया जाए।
Namamritam – Pure Bhakti, Pure Bliss
ब्रज के प्राचीन पद, भजन, कीर्तन, स्तोत्र, भक्त चरित्र और सनातन धर्म की आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने के लिए हमारे चैनल को Subscribe करें।
राधे राधे!
#प्यारेगोविन्दब्रजरखवारे #BrajKiPrachinLokTaan #KaviGovindJi #AkhadaTeela #BrajBhasha #KrishnaBhajan #BrajLokTaan #Namamritam #Vrindavan #KrishnaLeela #TraditionalBhajan #bhakti #radhakrishna #krishna #brajbhasha #ब्रजभाषामाधुर्य