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APNA RAAJ SONG PRESENT BY LUV MUSIC 2026

Luv music

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APNA RAAJ SONG PRESENT BY LUV MUSIC 2026

10 просмотров · 10 дней назад
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[INTRO — Spoken] Yeah… North Delhi! मुकंदपुर से आवाज़ उठी है… बुराड़ी, भलस्वा, सुल्तानपुरी… मंगोलपुरी से शालिमार बाग तक… ये सिर्फ इलाके नहीं, ये अपनी पहचान है! 🔥 [HOOK] दिल्ली मेरी जान, दिल्ली मेरी शान, हर गली में अपना नाम, हर दिल में अरमान। मुकंदपुर से बुराड़ी, अपना पूरा zone, भलस्वा से निकले तो attitude own. सुल्तानपुरी बोले — भाई अपना रंग, मंगोलपुरी में धड़कता अपना संग। शालिमार बाग से उठे ये आवाज़— अपनी दिल्ली, अपना अंदाज़! 🔥 [VERSE 1 — RAP] मुकंदपुर की गलियों से कहानी शुरू, छोटे-छोटे ख्वाब, मगर इरादे गुरु। सुबह की भाग-दौड़, रातों की मेहनत, दिल्ली ने सिखाया — खुद बन अपनी ताकत। बुराड़ी की सड़कें, सपनों की रेस, जेब चाहे खाली, दिल में confidence। भलस्वा की तरफ जब निकलता है crew, हर भाई बोले — “भाई, क्या scene है तू?” ना shortcut चाहिए, ना झूठी पहचान, मेहनत से बनाना अपना नाम। दिल्ली की मिट्टी में अलग ही बात, गिरके भी उठना — यही अपनी जात। [PRE-HOOK] जहाँ जाएँ अपने, vibe साथ जाए, दिल्ली का नाम हो तो दिल मुस्कुराए। एक आवाज़ और पूरा शहर बोले— “अपना भाई, अपना मोहल्ला, अपना छोरा!” [HOOK] दिल्ली मेरी जान, दिल्ली मेरी शान, हर गली में अपना नाम, हर दिल में अरमान। मुकंदपुर से बुराड़ी, अपना पूरा zone, भलस्वा से निकले तो attitude own. सुल्तानपुरी बोले — भाई अपना रंग, मंगोलपुरी में धड़कता अपना संग। शालिमार बाग से उठे ये आवाज़— अपनी दिल्ली, अपना अंदाज़! [VERSE 2 — RAP] सुल्तानपुरी में energy, दिल में आग, मंगोलपुरी के भाई खड़े हर भाग। दोस्ती हो सच्ची तो हिसाब नहीं, मुश्किल कितनी भी हो, जवाब सही। शालिमार बाग की रात, शहर की lights, अपने लोग साथ तो सब कुछ right। किसी के पास पैसा, किसी के पास नाम, पर मेहनत करने वाला ही बनाता मुकाम। दिल्ली में लाखों चेहरे, लाखों कहानी, हर गली की अपनी एक निशानी। पर जहाँ अपने खड़े, वहीं अपना शहर, दिल्ली के दिल में बसता अपना घर। [AREA CHANT — CROWD] मुकंदपुर! — अपना! बुराड़ी! — अपना! भलस्वा! — अपना! सुल्तानपुरी! — अपना! मंगोलपुरी! — अपना! शालिमार बाग! — अपना! [BRIDGE] ये सिर्फ नाम नहीं, ये अपने यार हैं। ये सिर्फ सड़कें नहीं, ये अपने ख्वाब हैं। जहाँ से चले थे, उसे भूलेंगे नहीं— दिल्ली ने जो दिया, उससे मुकरेंगे नहीं। [FINAL HOOK — BIG] दिल्ली मेरी जान, दिल्ली मेरी शान, हर गली में अपना नाम, हर दिल में अरमान। मुकंदपुर से बुराड़ी, आवाज़ जाए दूर, भलस्वा से उठे अपना पूरा सुरूर। सुल्तानपुरी का रंग, मंगोलपुरी का संग, शालिमार बाग में बजे अपना ढंग। North Delhi से पूरी दिल्ली तक आवाज़— अपनी दिल्ली! अपना अंदाज़! 🔥 [OUTRO] मुकंदपुर से… बुराड़ी तक… भलस्वा से… सुल्तानपुरी तक… मंगोलपुरी से… शालिमार बाग तक… ये दिल्ली है भाई… यहाँ सपने भी बड़े होते हैं, और उन्हें पूरा करने का जिगरा भी! ❤️‍🔥