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महालक्ष्मी जी हुईं विराजित, श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना

jaagutho

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महालक्ष्मी जी हुईं विराजित, श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना

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महालक्ष्मी जी हुईं विराजित, श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना अभिनय मोरे की रिपोर्ट गुना। मराठा समाज की धार्मिक परंपरा के तहत गुना के अवंती नगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बॉक्सिंग कोच अंकित देशमुख के निवास पर महालक्ष्मी जी (ज्येष्ठा-गौरी) की विधि-विधान से स्थापना की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। बॉक्सिंग कोच अंकित देशमुख ने बताया कि हिंदू सनातन परंपरा में लक्ष्मी जी के आठ स्वरूपों का उल्लेख मिलता है। श्री गणेशजी की स्थापना के तीसरे दिन ज्येष्ठा-गौरी अर्थात महालक्ष्मी जी की उनके पुत्र के साथ स्थापना करने की परंपरा है। मराठा समाज में इसे विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। मान्यता के अनुसार महालक्ष्मी जी ढाई दिन तक मायके में विराजित रहती हैं। उन्होंने बताया कि महालक्ष्मी जी के आगमन के पहले दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ स्थापना की जाती है। इस दिन पारंपरिक रूप से रोटी और चौरई की सब्जी का भोग लगाया जाता है। दूसरे दिन महालक्ष्मी जी के लिए विशेष भोजन तैयार किया जाता है। इसमें परिवार एवं इष्ट-मित्रों के साथ मिलकर विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। परंपरा के अनुसार 16 प्रकार की रोटी, चावल, 16 प्रकार की सब्जियां, 16 प्रकार की चटनी, रायता, अचार-मुरब्बे, पान, 16 प्रकार की मिठाइयां, हलवा सहित अनेक व्यंजन तैयार कर भोग लगाया जाता है। महालक्ष्मी जी के विदाई वाले दिन हल्का भोजन जैसे दूध-चावल, दही-चावल अथवा खीर आदि का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि विदाई के समय महालक्ष्मी जी का चेहरा उदास दिखाई देता है, ठीक उसी प्रकार जैसे मायके से विदा होते समय बेटी भावुक हो जाती है। अंकित देशमुख ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महालक्ष्मी जी ने असुरों का संहार किया था और उनकी शरण में आई सुहागिन महिलाओं के पतियों की रक्षा कर परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया था। इसी कारण महालक्ष्मी पूजन को परिवार की खुशहाली और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने महालक्ष्मी जी से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता का उल्लेख करते हुए बताया कि जब महालक्ष्मी जी मायके आईं तो उन्हें चूल्हे की ठंडी राख मिली, जिसे उन्होंने भोजन के रूप में ग्रहण कर लिया। जब गणेशजी ने उनसे पूछा कि मायके में क्या खाया, तो उन्होंने कहा कि इतने प्रकार के पकवान खाए कि गिनाना संभव नहीं है। इसके बाद गणेशजी द्वारा पूछे जाने पर योगमाया की शक्ति से 16-16 प्रकार के पकवानों का उल्लेख सामने आया। मान्यता है कि तभी से महालक्ष्मी जी को 16-16 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा चली आ रही है। महालक्ष्मी स्थापना के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। परिवार के सदस्यों एवं इष्ट-मित्रों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर महालक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। #guna #mahalaxmi #jaagutho #ramkumar #news #mp #latstnews