श्री बानोड़ा बालाजी दो बैलों की पौराणिक कथा 12 वर्षों तक बैलों द्वारा कठोर तप बानोड़ा बालाजी की लीला
Balwant Kumar Sharma
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श्री बानोड़ा बालाजी दो बैलों की पौराणिक कथा 12 वर्षों तक बैलों द्वारा कठोर तप बानोड़ा बालाजी की लीला
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जय श्री राम जय श्री बानोड़ा बालाजी श्री कल्लाजी राठौड़ ओम नमः शिवाय
जय श्री राम दोस्तों श्री बानोड़ा बालाजी की पौराणिक कथा जिसके अंदर दर्शाया गया है 1995-96 के साल के अंदर एक भक्त के स्वपन में श्री बालाजी महाराज ने दर्शन दिए और बोला कि पास में ही बरूंदनी बरूंदनी गांव में दो बैल है उन बैलों को लेकर आना है और रथ तैयार कर कर हर एक गांव में 14 साल के लिए रथ जाएगा और गांव-गांव में रामायण का पाठ पाठ होगा ऐसा आदेश श्री कैलाश जी गुरु महाराज को दिया जब कैलाश जी बरूंदनी गए तब बेल के मालिक ने मना कर दिया था बेल देने के लिए जब कैलाश जी वापस अपने घर आए उसी दिन शाम को बरूंदनी से बेल का मालिक बेल को लेकर बनोड़ा बालाजी और बैल रख कर गया फिर उसके बाद 500 से अधिक गांव में रामायण का पाठ हुआ और यह बेल गांव गांव का रथ को लेकर घूमने और रामायण का पाठ हुआ और एक समय ही इन्होंने अल्पाहार लिया
अभी भी ये नंदी जी महाराज सोमवार का उपवास रहते है यहां तक कि पानी भी नही ग्रहण नही करते है
बानोड़ा बालाजी :- कटुंडा मोड़ के पास
शिव धाम एव नंदी महाराज:- कटुंडा महादेव मंदिर