बृहत् पराशर होरा शास्त्र अध्याय 17 — राशियों की परस्पर दृष्टि | Rashi Drishti Explained
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बृहत् पराशर होरा शास्त्र अध्याय 17 — राशियों की परस्पर दृष्टि | Rashi Drishti Explained
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बृहत् पराशर होरा शास्त्र — अध्याय 17
राशियों की परस्पर दृष्टि
ग्रह-दृष्टि से पृथक एक और सूक्ष्म सिद्धांत — राशियों की अपनी
परस्पर दृष्टि। महर्षि पराशर मैत्रेय को चर-स्थिर-द्विस्वभाव
राशियों के तीन दृष्टि-नियम समझाते हैं, और यह भी बताते हैं कि
यह ज्ञान विवाह-मिलान में किस प्रकार निर्णायक भूमिका निभाता है।
⏱️ अध्याय के प्रमुख भाग (Timestamps):
00:00 परिचय
00:52 राशि-दृष्टि — तीन नियम
02:20 निकटवर्ती राशि क्यों नहीं देखी जाती
03:17 पूर्ण उदाहरण — चर एवं स्थिर राशियाँ
04:09 द्विस्वभाव राशियों का उदाहरण
04:51 व्यावहारिक उपयोग — विवाह-मिलान एवं योग
05:58 ग्रह-दृष्टि से भेद
🕉️ यह मूल, स्वरचित कथा-वाचन है — महर्षि पराशर एवं उनके शिष्य
मैत्रेय के संवाद के रूप में — बृहत् पराशर होरा शास्त्र के पारम्परिक
विषयों पर आधारित।
📖 अगला अध्याय (18): पंचधा मैत्री चक्र — ग्रहों की नैसर्गिक
मित्रता एवं शत्रुता का रहस्य।
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