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सर्वधर्मान्परित्यज्य का सही अर्थ | रामपाल की व्याख्या का खंडन | डॉ. शर्मा

Dr Gyanendra Sharma

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सर्वधर्मान्परित्यज्य का सही अर्थ | रामपाल की व्याख्या का खंडन | डॉ. शर्मा

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Dr Gyanendra Sharma
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“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।” — श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक का सही अर्थ क्या है? इस वीडियो में डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा गीता अध्याय 18, श्लोक 66 के संबंध में संत रामपाल की व्याख्या का खंडन प्रस्तुत करते हुए अपना शास्त्रीय पक्ष स्पष्ट कर रहे हैं। सुनिए इस श्लोक के अर्थ पर उनका विस्तृत विश्लेषण। गीता के किसी श्लोक को समझते समय उसके शब्दों, प्रसंग और अभिप्राय को कैसे देखा जाए? इस विषय पर डॉ. शर्मा के विचार जानने के लिए पूरा वीडियो देखें। डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा का अध्ययन संस्कृत भाषा, व्याकरण एवं भारतीय शास्त्रीय परंपरा से जुड़ा रहा है। इस मंच पर वे धर्मशास्त्र, भगवद्गीता, व्रत, पर्व और पूजा-विधि से संबंधित विषयों पर अपने अध्ययन एवं अनुभव के आधार पर संवाद करते हैं। 💬 इस श्लोक से जुड़ा अपना प्रश्न टिप्पणी में लिखें। 🔔 शास्त्रीय विषयों की विस्तृत चर्चा के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें। #BhagavadGita #SantRampal #DrGyanendraSharma #Gita1866 #सर्वधर्मान्परित्यज्य #भगवद्गीता डॉ. ज्ञानेन्द्र शर्मा — सनातन धर्म, शास्त्र, पूजा-विधि एवं वैदिक ज्योतिष शास्त्रों और भारतीय परंपरा से जुड़े विषयों पर सरल, प्रमाण-आधारित संवाद। 🌐 Website: https://drgyanendrasharma.in