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दशहरा खत्म होने के बाद कुल्लू में क्यों शुरू होता है दशहरा? 300 देवताओं का महासंगम

दिव्य हिमालय

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दशहरा खत्म होने के बाद कुल्लू में क्यों शुरू होता है दशहरा? 300 देवताओं का महासंगम

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कुल्लू दशहरा 2026 | राजा जगत सिंह, रघुनाथ जी की कथा और देवभूमि हिमाचल का दिव्य उत्सव क्या आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में दशहरा, देश के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग तरीके से मनाया जाता है? यहाँ न तो रावण के विशाल पुतले जलाए जाते हैं और न ही पारंपरिक रामलीला का आयोजन होता है। इसके बजाय, कुल्लू दशहरा भगवान रघुनाथ जी की भक्ति, सैकड़ों देवी-देवताओं के महासंगम और सदियों पुरानी हिमाचली परंपराओं का अद्भुत उत्सव है। 🏔️ कुल्लू दशहरा की अनोखी परंपरा और राजा जगत सिंह की कथा कुल्लू दशहरा की कहानी राजा जगत सिंह से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोककथा से शुरू होती है। कहा जाता है कि राजा जगत सिंह को एक ब्राह्मण दुर्गादत्त के पास अनमोल मोतियों की जानकारी मिली। राजा ने उन मोतियों को प्राप्त करने की इच्छा जताई, लेकिन घटनाएँ ऐसी बदलीं कि ब्राह्मण और उसका परिवार दुखद परिस्थितियों का शिकार हो गए। इसके बाद राजा को गहरे पश्चाताप और एक भयानक श्राप का सामना करना पड़ा। लोककथा के अनुसार, राजा को अपने भोजन में चावल की जगह कीड़े और पानी की जगह रक्त दिखाई देने लगा। इस संकट से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान रघुनाथ जी की शरण ली। कहा जाता है कि अयोध्या से भगवान रघुनाथ जी की प्रतिमा कुल्लू लाई गई और राजा ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान को अपना आराध्य स्वीकार किया। इसके बाद राजा जगत सिंह ने अपना राज्य भगवान रघुनाथ जी को समर्पित कर दिया और स्वयं उनके सेवक के रूप में शासन करने लगे। इस परंपरा ने कुल्लू की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को गहराई से प्रभावित किया। आज भी कुल्लू दशहरा इसी आस्था, समर्पण और भगवान रघुनाथ जी की महिमा का प्रतीक माना जाता है। 🚩 ढालपुर मैदान की भव्य रथ यात्रा विजयादशमी के दिन कुल्लू के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथ यात्रा के साथ उत्सव का विशेष आरंभ होता है। श्रद्धालु भगवान के रथ को खींचते हैं और पूरा क्षेत्र भक्ति, संगीत तथा पारंपरिक उल्लास से भर उठता है। 🙏 सैकड़ों देवी-देवताओं का महासंगम कुल्लू दशहरा की सबसे अनूठी विशेषताओं में से एक है आसपास के गाँवों और घाटियों से देवी-देवताओं की पालकियों का आगमन। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, देव धुनों और रंग-बिरंगे स्थानीय परिधानों के बीच यह दृश्य हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है। 🌄 मोहल्ला और अंतिम दिन का लंका दहन कुल्लू दशहरा के दौरान मनाया जाने वाला मोहल्ला भी उत्सव की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। उत्सव के अंतिम दिन भगवान रघुनाथ जी की यात्रा ब्यास नदी के तट की ओर बढ़ती है, जहाँ परंपरा के अनुसार लंका दहन की रस्म निभाई जाती है। यह आयोजन कुल्लू दशहरा के समापन को एक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक अर्थ देता है। 📅 अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा 2026 तारीख: 21 से 27 अक्टूबर 2026 स्थान: ढालपुर मैदान, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश, भारत मुख्य आकर्षण: भगवान रघुनाथ जी की रथ यात्रा, देवी-देवताओं का महासंगम, हिमाचली लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और लंका दहन। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हिमाचल की आस्था, इतिहास, लोककथाओं और देव संस्कृति का जीवंत उत्सव है। 🙏 अगर आपको कुल्लू दशहरा की यह अनोखी कहानी पसंद आई हो, तो वीडियो को LIKE करें, अपने दोस्तों और परिवार के साथ SHARE करें और हिमालय की संस्कृति, मंदिरों, त्योहारों तथा आध्यात्मिक रहस्यों से जुड़ी ऐसी ही रोचक कहानियों के लिए *Divya Himalaya* चैनल को SUBSCRIBE करना न भूलें। 💬 आपके विचार में कुल्लू दशहरा की सबसे अनोखी परंपरा कौन-सी है? कमेंट में ज़रूर बताइए। --- Kullu Dussehra 2026 | Raja Jagat Singh & Lord Raghunath Ji's Story Why is Kullu Dussehra different from the rest of India? Here, giant Ravana effigies aren't burnt, and traditional Ramlila isn't performed. Instead, this unique Himalayan festival celebrates Lord Raghunath Ji, ancient traditions, and the gathering of hundreds of village deities. 🏔️ The Legend of Raja Jagat Singh According to local legend, Raja Jagat Singh sought precious pearls belonging to a Brahmin named Durga Dutt. A tragic chain of events left the king consumed by remorse and suffering a terrible curse. Seeking relief, he turned to Lord Raghunath Ji, whose idol was brought from Ayodhya to Kullu. The king dedicated his kingdom to the deity and became his servant. This sacred tradition remains at the heart of Kullu Dussehra. 🚩 Rath Yatra at Dhalpur Ground On Vijayadashami, devotees pull Lord Raghunath Ji's sacred chariot in a grand procession, accompanied by traditional music and devotional chants. 🙏 The Divine Gathering Hundreds of village deities arrive in decorated palanquins, showcasing Himachal Pradesh's living Dev Sanskriti and rich Himalayan heritage. 🌄 Mohalla & Lanka Dahan The festival concludes with traditional ceremonies near the Beas River, including the ritual of Lanka Dahan, giving Kullu Dussehra its distinctive identity. 📅 International Kullu Dussehra 2026 🗓️ 21–27 October 2026 📍 Dhalpur Ground, Kullu, Himachal Pradesh, India Kullu Dussehra is a celebration of Himalayan faith, folklore, and centuries-old traditions. 🙏 LIKE, SHARE & SUBSCRIBE to "Divya Himalaya" for more stories about Himalayan temples, Indian festivals, and spiritual mysteries. 💬 Which Kullu Dussehra tradition fascinates you most? Tell us in the comments! #KulluDussehra2026 #KulluDussehra #HimachalPradesh #DivyaHimalaya #HimachalCulture #Dussehra2026