शिव, विष्णु अम्बे, गुरु सहित श्री निखिलेश्वर सन्यास आरती | दैनिक संध्यावंदन | Nikhil Premee Pradeep
Gyan Bhakti Sadhana - Yog Vigyan и Dr. Narayan Dutta Shrimali Sadhana
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शिव, विष्णु अम्बे, गुरु सहित श्री निखिलेश्वर सन्यास आरती | दैनिक संध्यावंदन | Nikhil Premee Pradeep
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0:00 शिव, विष्णु अम्बे, गुरु सहित श्री निखिलेश्वर सन्यास आरती | दैनिक संध्यावंदन
नारायणो त्वं निखिलेश्वरो त्वं, माता-पिता गुरु आत्म त्वमेवं ।
ब्रम्हा त्वं विष्णुश्च रुद्रस्त्वमेवं, (सिद्धाश्रमो त्वं गुरुत्वं प्रणम्यम्)२॥
कर्पूर गौरं करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारम् ।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे, (भवं भवानी सहितं नमामि)२॥
2:04 श्री निखिलेश्वर सन्यास आरती
ॐ जय संन्यासी अग्रणी, (जय शान्तं रुपं)२ ।
(जय जय संन्यस्त्वं मा)२, जय भगवद् रुपं ॥१॥
हिमालये निवसति मुक्तं (प्रकृति त्वां मध्ये)२ ।
(विचरति गिरिवर गहने)२ गह्वरसहि मुदितां ॥२॥
शान्तं वेशं भव्यं (अद्वितीय रूपं)२
(व्याघ्रं वज्र विहन्तुं)२, वक्षस्थल त्वं त्वं ॥३॥
वेद पुराण शास्त्रं (ज्योतिष महितत्वं)२ ।
(मंत्र-तंत्र उद्धारय)२, साध्यं सहि सहितं ॥४॥
ऋषि दिव्यं देह भस्मं (रुद्राक्षं सहितं)२ ।
(विचरति निशिदिन प्राप्ते)२ धन्य मही युक्तं॥५॥
सिद्धाश्रम सप्राणं, (मन्त्रं स्रष्टृत्वं)२
(लक्षं लक्ष निहारत)२, अद्वय अधि युक्तं ॥६॥
भव्य विशालं नेत्रं, (भालं तेजस्वं)२ ।
(लक्षं शिष्यम् ध्यावति)२, निखिलेश्वर गुरुवं॥७॥
संगीत युक्त आरातिकं (पठत् यदि श्रृणुतं)२ ।
(गुरु मोद वर प्राप्तुं)२, शिष्यत्वं पूर्ण ॥८॥
6:38 सद्गुरु श्री निखिलेश्वर गुरु आरती
जय गुरुदेव दयानिधि, दीनन हितकारी ।
(जय जय मोह विनाशक)२ भव-बन्धन हारी ॥१॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुरु मूरत धारी ।
(वेद पुराण बखानत)२ गुरु महिमा भारी ||२॥
जप तप तीरथ संयम, दान विविध कीजै ।
( गुरु बिन ज्ञान न होवे)२ कोटि यतन कीजै ॥३॥
माया-मोह नदी जल, जीव बहे सारे ।
(नाम जहाज बिठा कर)२ गुरु पल में तारे ॥४॥
काम क्रोध मद मत्सर, चोर बड़े भारी ।
(ज्ञान-खड्ग दे कर में)२ गुरु सब संहारे ॥५॥
नाना पंथ जगत में, निज-निज गुण गावें ।
(सबका सार बता कर)२ गुरु मारग लावें ॥६॥
गुरु चरणामृत निर्मल, सब पातक-हारी ।
(वचन सुनत श्री गुरु के)२ सब संशयहारी ॥७॥
तन मन धन सब अर्पण, गुरु चरणन कीजै।
(ब्रह्मानन्द परम पद)२ मोक्ष गति दीजै ॥८॥
11:11 शिव आरती (नेपाली)
ॐ जय शिव शङ्कर शम्भो, (जय गिरिजाधीश)-२।
(जय जय करुणासागर)-२, पशुपति जगदीश॥१॥
गिरि कैलाश निवास छ, (गण छन् सहचारी)-२।
(मुण्डमाला छ गलामा)-२, रूप छ भयहारी॥२॥
डमरू त्रिशूल सुशोभित, (प्रभुका दुई करमा)-२।
(भूषण नाग विराजित)-२ बाघाम्वर तनमा॥३॥
तीन नयनमा थरिथरि, (ज्योति छ दिव्य सदा)-२।
(वाहन वृषभ मनोरह)-२, संगमा छन् गिरिजा॥४॥
भस्म विलेपन सुन्दर, (शिरमा चन्द्रकला)-२।
(कल कल बग्छिन् हर्दम)-२ गङ्गा पुण्यजला॥५॥
ब्रम्हा, विष्णु, महेश्वर, (प्रभुका रूप सबै)-२।
(सृष्टि स्थिति लय सब हुन् )-२ शिवलीला प्रभुकै॥६॥
वेद पुराण थकित छन्, (प्रभुको वर्णनमा)-२।
(कणकण व्यापक प्रभुको)-२, महिमा त्रिभुवनमाl॥७॥
सुर नर मुनि सब प्रभुकै, (निशिदिन ध्यान गरी)-२।
(परमानन्द मगन भई)-२ जान्छन् पार तरी॥८॥ .
सच्चिदानन्द परात्पर, (सज्जन हितकारी)-२।
(जय जय साम्ब सदाशिव)-२ जयजय त्रिपुरारी॥९॥
15:50 श्री हरि जगदीश्वर विष्णु आरती (नेपाली)
ॐ जय जगदीश हरे, प्रभु जय जगदीश हरे।
प्रभुका चरण उपासक, हरिका चरण उपासक, कति-कति तरे ॥१॥
मनको थाल मनोहर, प्रेमरूप बाती, प्रभु प्रेमरूप बाती ।
भाव-कपुर छ मंगल, भाव-कपुर छ मंगल, आरती सब भाँति ॥२॥
नित्य निरञ्जन निर्मल, कारण अविनाशी, प्रभु कारण अविनाशी।
शरणागत प्रतिपालक, शरणागत प्रतिपालक, चिन्मय सुखराशी ॥३॥
सृष्टि-स्थिति-लयकर्ता, त्रिभुवनका स्वामी, प्रभु त्रिभुवनका स्वामी ।
भक्ति-सुधा वर्षाऊ, प्रेम-सुधा वर्षाऊ,शरण पर्यौँ हामी ॥४॥
आसुर भाव निवारक, तारक सुखदाता, प्रभु तारक सुखदाता ।
गुणअनुरूप तिमी हौ, गुणअनुरूप तिमी हौ, हरिहर हौ धाता ॥५॥
युग-युग पालना गर्छौ, अगणित रूप धरी, प्रभु अगणित रूप धरी ।
लीलामय रसविग्रह, लीलामय रसविग्रह, करुणामूर्ति हरि ॥६॥
समता शान्तिप्रदायक, सज्जन हितकारी, प्रभु सज्जन हितकारी ।
चरणशरण अब पाऊँ, चरणशरण अब पाऊँ, प्रभु भवभय हारी ॥७॥
भाव मनोहर देऊ, साधक फलदायी, प्रभु साधक फलदायी ।
जीवन धन्य बनोस् प्रभु, जीवन पूर्ण बनोस् प्रभु, प्रभु पद सेवा पाई ॥८॥
संयम सुरसरिताको, अविरल धारा बहोस्, प्रभु अविरल धारा बहोस् ।
जति-जति जन्म भए पनि, जहाँ-जहाँ जन्म भए पनि, प्रभुमा प्रेम रहोस् ॥९॥
प्रेमसहित शुभ आरती, जसले नित्य गर्यो, प्रभु जसले नित्य गर्यो ।
निश-दिन निर्मल बन्दै, प्रतिदिन पावन बन्दै, त्यो भवसिन्धु तर्यो ॥१०॥
22:30 जगत जननी जगदम्बे दुर्गा आरति
ॐ जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी ।
(तुमको निशदिन ध्यावत)-२, हरि ब्रह्मा शिव जी ॥१॥
मांग सिन्दूर विराजत, (टीको मृगमद को)-२ ।
(उज्ज्वल से दोउ नैना)-२, चन्द्रवदन नीको ॥२॥
कनक समान कलेवर,(रक्ताम्बर राजै)-२ ।
(रक्तपुष्प गल माला)-२, कंठन पर साजै ॥३॥
के हरि वाहन राजत, (खड्ग खप्पर धारी)-२ ।
(सुर नर मुनि जन सेवत)-२, तिनके दुखहारी ॥४॥
कानन कुण्डल शोभित, (नासाग्रे मोती)-२ ।
(कोटिक चन्द्र दिवाकर)-२, सम राजत ज्योती ॥५॥
शुम्भ-निशुम्भ विदारे, (महिषासुर घाती)-२ ।
(धूम्र-विलोचन नयना)-२, निशदिन मदमाती ॥६॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, (शोणित बीज हरे)-२ ।
(मधु-कैटभ दोउ मारे)-२, सुर भय दूर करे ॥७॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी, (तुम कमला रानी)-२ ।
(आगम निगम बखानी)-२, तुम शिव पटरानी ॥८॥
चौंसठ योगिनी गावत, (नृत्य करत भैरों )-२।
(बाजत ताल मृदंगा)-२, अरू बाजत डमरू ॥९॥
तुम ही जग की माता, (तुम ही हो भरता )-२,
(भक्तन की दुख हरता)-२, सुख संपति करता ॥१०॥
भुजा चार अति शोभित,(वर मुद्रा धारी )-२।
(मनवांछित फल पावत)-२, सेवत नर नारी ॥
कंचन थाल विराजत, (अगर कपूर बाती )-२।
(श्रीमालकेतु में राजत)-२, कोटि रतन ज्योती ॥११॥
श्री अंबेजी की आरति, (जो कोइ नर गावे)-२ ।
(कहत शिवानंद स्वामी)-२, सुख-संपति पावे ॥१२॥
30:14 आरती पश्चात्शान्तिपाठः एवं पुष्पाञ्जली
32:04 सद्गुरु श्री निखिलेश्वर पंचकं
34:02 श्री निखिलेश्वर समर्पण स्तुति
जय गुरुदेव हरि ॐ तत् सत् ।