श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 | सांख्य योग | आत्मा का ज्ञान और कर्म का रहस्य | Geeta Saar
Bhajan Mala
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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 | सांख्य योग | आत्मा का ज्ञान और कर्म का रहस्य | Geeta Saar
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ॐ श्री कृष्णाय नमः 🙏 जय श्री कृष्ण।
श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय — सांख्य योग में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मा, शरीर, कर्म, सुख-दुःख और स्थिर बुद्धि का गहरा ज्ञान देते हैं।
अर्जुन जब अपने कर्तव्य को लेकर भ्रमित और दुखी होते हैं, तब श्रीकृष्ण उन्हें समझाते हैं कि आत्मा न जन्म लेती है और न कभी मरती है। शरीर परिवर्तनशील है, लेकिन आत्मा शाश्वत है।
इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध संदेश भी आता है—
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”
अर्थात, मनुष्य का अधिकार कर्म करने में है, केवल उसके फल पर नहीं।
इस वीडियो में सुनिए अध्याय 2 का सरल और भावपूर्ण Geeta Saar, जिसमें आत्मा का ज्ञान, कर्म का महत्व, सुख-दुःख में समान रहना, मन पर नियंत्रण और स्थिर बुद्धि का मार्ग सरल भाषा में समझाया गया है।
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जय श्री कृष्ण 🙏
हरि ॐ तत्सत।
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