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उसके लिए कचरा, दूसरों के लिए रत्न; जो उसने खोया, वह सबकी चाह है।

नाटक तूफान

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उसके लिए कचरा, दूसरों के लिए रत्न; जो उसने खोया, वह सबकी चाह है।

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नाटक तूफान
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शिउलान ने अपने बेटे चेन शियाओलोंग की पढ़ाई के लिए अपनी सेहत और जीवन की सारी जमा पूँजी दाँव पर लगा दी। उसे उम्मीद थी कि बेटा बड़ा होकर उसका सहारा बनेगा। लेकिन शहर पहुँचते ही शियाओलोंग अपनी गरीबी और माँ, दोनों से रिश्ता छिपा लेता है। वह खुद को अनाथ बताकर अमीर परिवार की बेटी झोउ लिंग से शादी कर लेता है। जब शिउलान उससे मिलने शहर आती है, तो बेटा उसे माँ कहने के बजाय “चिन आंटी” बताता है। ससुरालवालों की बेरुखी और अपमान के बीच उसकी चुप्पी सब कुछ सहती रहती है। तभी उसकी मुलाकात म्यू तियानचेन से होती है—वही बच्चा, जिसे शिउलान ने कभी मुश्किल वक्त में सहारा दिया था और जो अब एक सफल अमीर व्यक्ति बन चुका है। म्यू तियानचेन भीड़ में अपनी मुँहबोली माँ को पहचान लेता है और उसे वह सम्मान देता है, जिसकी वह हमेशा हकदार थी। क्या शिउलान का बेटा अपने स्वार्थ की कीमत समझ पाएगा? रिश्तों, कृतज्ञता और माँ के मौन त्याग की यह कहानी दिल छू जाएगी।