कबीर ने कैसे तोड़ा धर्म और अहंकार का भ्रम?
Tryna
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कबीर ने कैसे तोड़ा धर्म और अहंकार का भ्रम?
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Tryna
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आज सुबह जब आप अपने घर से बाहर निकले, तो आपने मंदिर, मस्जिद और धर्म के नाम पर बंटी हुई दुनिया देखी। आपको लगता है कि समाज का यह अंधा उन्माद केवल आज के दौर की देन है, लेकिन 600 साल पहले कबीर ने काशी के चौक पर खड़े होकर इसी पाखंड की रीढ़ तोड़ दी थी। जब सच बोलने पर दुनिया मारने दौड़ती है और झूठ पर भरोसा कर लेती है, तो असल में भ्रम में कौन जी रहा है?
इस वीडियो में आप कबीर के अमर ग्रंथ 'बीजक' (The Bijak of Kabir) के प्रसिद्ध शबद 4 और शबद 84 के जरिए इंसानी अहंकार और धार्मिक पाखंड का गहरा मनोवैज्ञानिक सच जानेंगे। आप समझेंगे कि क्यों कबीर ने काशी के पंडितों और सुल्तान के काजियों दोनों के खोखले आडंबरों पर खुला प्रहार किया था। लिंडा हेस, शार्लोट वाउडेविल और डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी के ऐतिहासिक शोध के आधार पर जानिए कि कबीर का 'राम' मंदिर-मस्जिद की दीवारों में नहीं, बल्कि आपकी हर सांस और चेतना में धड़कने वाला अनाहत नाद है।
यदि यह विचार आपकी चेतना को झकझोरता है और आप जीवन को एक नए नजरिए से देखना चाहते हैं, तो वीडियो को लाइक करें, अपने विचार नीचे कमेंट में साझा करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।
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