🌺प्रेमचंद की कहानी ठाकुर का कुआं का उद्देश्य और मूल संवेदना 🌺
हिन्दी रसधारा
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🌺प्रेमचंद की कहानी ठाकुर का कुआं का उद्देश्य और मूल संवेदना 🌺
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🌺प्रेमचंद की कहानी ठाकुर का कुआं का उद्देश्य और मूल संवेदना 🌺
प्रेमचंद साहित्य का प्रमुख स्वर्ण समाज सुधार था वह मानते थे कि कल का कार्य मनोरंजन नहीं सामाजिक स्वदेशी ता है प्रेमचंद की कहानियों में समाज की कुर्ती और राजनीतिक उथल पुथल किसने की दैनिक स्थिति सामाजिक रोगियों के बंधन में करती नारियों की विवेचना का मार्मिक चित्रण हुआ है प्रेमचंद दलित और शोषित वर्ग के प्रति संवेदना से भरे हुए हैं ठाकुर का कुआं कहानी भी इसी प्रकार की है यह प्रेमचंद की प्रतिनिधि कहानी है कहानी का उद्देश्य है कि ठाकुर का कुआं एक यथार्थवादी कहानी है जिसमें दो गरीब परिवार से पति पत्नी है जो खूब और उसकी पत्नी गंगी जो कि नीचे जाति के कहे जाते हैं और उन्हें साहू करो और ठाकुर के कुएं से पानी भरने का अधिकार नहीं है प्रतिबंधित किया गया है यानी इस कहानी के माध्यम से प्रसिद्ध महान उपन्यासकार कहानीकार प्रेमचंद जी कहते हैं कि उसे समय में गांव की सामाजिक स्थिति ऐसी थी कि लोग एक दूसरे में जातिगत भेदभाव करते थे और वही इस कहानी के माध्यम से प्रेमचंद जी ने उसे समय के समाज की स्थिति को दर्शाया है तो दोस्तों इस कहानी को पढ़ने के बाद आपको उसे समय के समाज की स्थिति का ज्ञान हो जाएगा और प्रेमचंद जी इस कहानी के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि हर इंसान अपने गुना से महान होता है जाति से नहींइसलिए सभी मनुष्य को समान समझना चाहिए और पानी पिलाना धर्म होता है लोग पानी पिलाने के लिए प्याऊ लगते हैं और गांव में कहीं जगह ऐसी स्थिति है बल्कि आज भी इतने आधुनिक युग में भी अब भी आपको यह है पुराने रूडी रीति रिवाज मिल जाएंगे जहां कुछ नहीं किया जाता है और मानव मानव में भेद किया जाता है और उच्च जान नीचे जाति वालों पर अत्याचार करते हैं अपमान करते हैं और उनका शोषण करते हैं अगर आपको इस कहानी को सुनने के बाद आपकी मानवीय संवेदना जाग जाए तो इस कहानी को लाइक शेयर जरूर करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूले धन्यवाद।
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