Sikha hi do - Músafír
MUSAFIR
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Sikha hi do - Músafír
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दिल को नया बहाना सिखा ही दो,
ये दुनिया ये जमाना सिखा ही दो,
हमें रोक दिया जहाँ इंतजार ने,
वहाँ से गुजर जाना सिखा ही दो।
हमें भी सफर में नए उन्वान दो,
हमें भी यूँ सताना सिखा ही दो।
हमें भी अता करो ये दिलकश हुनर,
हमें भी लौ बुझाना सिखा ही दो।
तुमने तारों को चाँद मेरे देखा है,
हमें भी टूट जाना सिखा ही दो।
या तो इस परिन्दे को ज़िबा कर दो,
या क़फ़स से चिल्लाना सिखा ही दो।
तुम मुझे ज़िन्दा कैसे रखती हो,
सुनो! जान बचाना सिखा ही दो।
हम भी कहीं से तेरे मरासिम है,
तुम्हे अपना बनाना सिखा ही दो।
हमें दोज़ख़ से नहीं लगता डर,
हमें दिल तक आना सिखा ही दो।
अपने बचपन से करो रिहा या,
सारे राज़ चबाना सिखा ही दो।
तुम ही दीवानों की हद लिख दो,
हमें भी आजमाना सिखा ही दो।
तुम मेरे खुदा हो फिर डर कैसा,
ये जमीं सजाना सिखा ही दो।।
हमें लौट जाना सिखा ही दो।।।