भस्म तन पर रमी, तो मन अजर हो गया 🙏 | अंत में शिव ही मेरा पिता हो गया | Mahakal Bhajan
Prem Bhakt
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भस्म तन पर रमी, तो मन अजर हो गया 🙏 | अंत में शिव ही मेरा पिता हो गया | Mahakal Bhajan
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Prem Bhakt
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भस्म तन पर रमी, तो मन अजर हो गया 🙏 | अंत में शिव ही मेरा पिता हो गया | Mahakal Bhajan
हर हर महादेव! जय श्री महाकाल! 🔱
जब माथे पर महाकाल की धूल तिलक बन जाए, जब दर्द प्रार्थना बन जाए और जब मन संसार के मोह से दूर होकर शिव के चरणों में समर्पित हो जाए, तब जीवन का हर भाव भक्ति बन जाता है।
🙏 प्रस्तुत है एक भावपूर्ण महाकाल भजन — भस्म तन पर रमी, तो मन अजर हो गया।
इस भजन की हर पंक्ति भगवान शिव के प्रति समर्पण, वैराग्य और अटूट श्रद्धा का भाव व्यक्त करती है।
🔱 भजन की विशेष पंक्तियाँ:
धूल माथे लगाई, तिलक हो गया।
टूटा सारा भरम, मन सरल हो गया।
दर्द को स्वर मिला, तो भजन हो गया।
अंत में शिव ही मेरा पिता हो गया।
यदि आप भी महादेव को अपना आराध्य और पिता मानते हैं, तो इस भजन को सुनें और शिवभक्ति के इस भाव को अपने हृदय में अनुभव करें।
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