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Kathak Navras by Dr. Ragini Makkhar (Part-2)

Naadyog Kathak Ki Paathshala By Dr. Ragini Makkad

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Kathak Navras by Dr. Ragini Makkhar (Part-2)

18 568 просмотров · 7 лет назад
Naadyog Kathak Ki Paathshala By Dr. Ragini Makkad
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This video contains: Shringar Ras, Vibhats Ras and Karun Ras. Shringar Ras (श्रृंगार रस) : इसका स्थाई भाव रति होता है। नायक और नायिका के मन में संस्कार रूप में स्थित रति या प्रेम जब रस कि अवस्था में पहुँच जाता है तो वह श्रंगार रस कहलाता है। इसके अंतर्गत सौन्दर्य, प्रकृति, सुन्दर वन, वसंत ऋतु, पक्षियों का चहचहाना आदि के बारे में वर्णन किया जाता है। Thumri composed by: Pt. Bindadin Maharaj Vibhats Ras (विभत्स रस): इसका स्थायी भाव जुगुप्सा होता है। घृणित वस्तुओं, घृणित चीजो या घृणित व्यक्ति को देखकर या उनके संबंध में विचार करके या उनके सम्बन्ध में सुनकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा या ग्लानि ही वीभत्स रस कि पुष्टि करती है। दूसरे शब्दों में वीभत्स रस के लिए घृणा और जुगुप्सा का होना आवश्यक होता है। Karun Ras (करुण रस): इसका स्थायी भाव शोक होता है। इस रस में किसी अपने का विनाश या अपने का वियोग, द्रव्यनाश एवं प्रेमी से सदैव विछुड़ जाने या दूर चले जाने से जो दुःख या वेदना उत्पन्न होती है, उसे करुण रस कहते हैं यधपि वियोग श्रंगार रस में भी दुःख का अनुभव होता है। लेकिन वहाँ पर दूर जाने वाले से पुनः मिलन कि आशा बंधी रहती है। अर्थात् जहाँ पर पुनः मिलने कि आशा समाप्त हो जाती है करुण रस कहलाता है। इसमें निःश्वास, छाती पीटना, रोना, भूमि पर गिरना आदि का भाव व्यक्त होता है। किसी प्रिय व्यक्ति के चिर विरह या मरण से जो शोक उत्पन्न होता है उसे करुण रस कहते है। Connect with us-   / raginimakkharnaadyog     / ragini.makkhar   https://www.instagram.com/dr.raginima... https://twitter.com/rmakkhar?lang=en